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Sunday, February 14, 2016

तो क्या होता..! (गज़लनुमा गीत ।)

 तो क्या होता..! (गज़लनुमा गीत ।)

यादों की   जात, कुंवारी  होती तो, क्या  होता..!
हिज़्र की लाश, तुम्हारी  होती तो, क्या   होता..!

हिज़्र = जुदाई; कुंवारी = वर्जिन.
१.
छिन   लेता  चैन- ओ -अमन,  तेरे   पैमाने  से । 
किस्मत से   ऐसी   यारी   होती,  तो क्या होता..!

चैन-ओ-अमन= सुखचैन-शांति;  पैमाना= ज़िंदगी.
२.
तेज़  हो  जाती  है क्या धड़कनें,  हर  वस्ल में ?
हमें  भी, दिल की बिमारी होती, तो क्या होता..!

वस्ल=मिलन.
३.
गुमनाम मंज़िलों का सफर, सीधा नहीं  होता ।
पैने   काँटों  की  सवारी  होती  तो, क्या होता..!

मंज़िल=पड़ाव,मुकाम; सीधा=सरल,आसान. 
पैना= तीक्ष्ण;धारदार.
४.
ख़ुदकुशी  करने  पर  तुली  थी  कमज़ोर साँसें ।
और   शिकस्त   करारी   होती  तो  क्या होता...!

ख़ुदकुशी= आपघात; शिकस्त=हार,पराजय.

मार्कण्ड दवे - दिनांक - १३-०२-२०१६.

Tuesday, December 4, 2012

MAUT KI AAHAT- HINDI GEET BY MARKAND DAVE.





मौत की आहट। (गज़लनुमा गीत)

गीतकार-स्वरांकन-संगीत-गायक-मार्कंड दवे ।

संगीत-स्वरायोजन-प्रसुन चौधरी.


हर  साँस  मे  मौत की आहट सुनाई देती  है ।
ज़िंदगी अब तो  गिन-गिन के बदला लेती है ।
१. 
ज़िंदगी   जीने  मे  जो  माहिर  माने  जाते  थे ।
उनको अब जीने की रीत देखो सिखाई जाती है ।
हर साँस मे ...................
२.
बेआबरु न हो कोई, मैं तो ख़ामोश रहता था ।
कहानी मेरी ही अब मुझ को सुनाई जाती है ।
हर साँस मे ...................

३.
मुआफ़  करना  गुस्ताख़ी  अगर  हो  कोई ।
आखरी ख़्वाहिश, सभी से तो पूछी जाती है ।
हर साँस मे ...................

मार्कड दवे ।

M.K.AUDIO-VIDEO RECORDING STUDIO.
AHMEDABAD-GUJARAT. INDIA. 






Saturday, November 24, 2012

GEET-GAZAL KE SAYE MEN.




M.K. ARTS PVT.LTD.
AHMADABAD-GUJARAT.

PRESENTS

"GEET-GAZAL KE SAYE MEN." 

(Recorded Year-1990.)

http://www.youtube.com/watch?v=-1TqM5X60C4&feature=youtu.be

SONGS WRITER-COMPOSER-MUSIC DIRECTOR -MARKAND DAVE.

CO-SINGER- SUSHRI PARUL VYAS.

MUSIC-SHRI PRASUN CHUDHARI-MARKAND DAVE.

M.K.AUDIO-VIDEO RECORDING STUDIO.


http://mktvfilms.blogspot.in

MAIL- mdave42@gmail.com




Wednesday, May 16, 2012

My 61st Birthday


GAZALNUMA GEET-QUAFAN-कफ़न ।



Markand Dave & MKTVFILMS

PRESENTS

HINDI GAZALNUMA GEET- -कफ़न।

पसीने से भिगे बदन ।


ये पसीने से भिगे हुए हैं बदन।
पेट भरने को छोड़ा है अपना वतन।


शहर में ये उठता धुआँ सा क्यूँ है?
किसी मजबूर दिल की है ये जलन।
पेट भरने को छोड़ा है अपना वतन।


ठेलोँ के नीचे बँधी ये चादर क्यूँ है?
पलते है ईनमे देखो ग़रीबों के रतन।
पेट भरने को छोड़ा है अपना वतन।


ये रोते-बिलखते मासूम क्यूँ है?
बेबसी ने बिकाया, माँ का ये तन।
पेट भरने को छोड़ा है अपना वतन।


फुटपाथ भी ये परेशान क्यूँ हैं?
औढकर कोई सोया हुआ है कफ़न।
पेट भरने को छोड़ा था उसने वतन।

मार्कण्ड दवे।दिनांकः२६/०२/२०११.


मैं और मेरी कहानियाँ- तथास्तु ।

प्रेरणात्मक कहानी संग्रह- किताब प्राप्तिस्थान
- mdave42Gmail.com

OR Mob:9376913202 Time-9.00 Am to 12.Noon


THANKS.

MARKAND DAVE

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