Thursday, September 29, 2016

मुजरिम ।


जा कर खड़ी है महोब्बत आज, मुजरिमों के कठहरे में,
 
गवाह भी  तू, मुंसिफ़ भी  तू, अन्जाम अब  ख़ुदा जाने..!


मुजरिम = अपराधी; 
कठहरा = communion rail;
गवाह =  साक्षी;
मुंसिफ़ = न्यायाधीश;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः २० अगस्त २०१६.


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