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Monday, June 22, 2009

दिलकी बातें किसे सुनाए.

दिल रख लो चाहे कुचल डालो।
(courtesy-Google images)



दिल की बातें किसे सुनाए,

सुने ना कोई तेरे शहर में,

दाग़ दिल के किसे बताए,

संगदिल हर कोई तेरे शहर में,


आशियाना मेरा था

तेरे घर के सामने

फिर भी मेरे यार तरसे,

सा-मो-शहर तेरे शहर में,


चाह लेकर आया था,

दर्द लेकर लौटा हुं

रख लो चाहे कुचल डा-लो,

दिल छोड़ा है,तेरे शहर में,


क्या बताए हाल यारों,

ज़ख्म लगे क्यों जिस्म पर,

संगदिलों के संग से,

बे-हाल हुए है,तेरे शहर में,


दिल की बातें किसे सुनाए,

सुने ना कोई तेरे शहर में,

दाग़ दिल के किसे बताए,

संगदिल हर कोई तेरे शहर में,

5 comments:

  1. मकरंद भाई,
    यह बहुत ही अच्छा प्रयास है. इसे जारी रखें. सादर शुभकामनाएं.

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  2. आपका स्वागत है..... अच्छे लेखन के लिए शुभकामनाएं .....

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  3. ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है.

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  4. dil ki baat ...
    sahar ki zindgi...

    bahut khoob rachna hai aapki

    badhaai
    badhaai
    badhaai
    ___________bahut badhaai !

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  5. हिंदी भाषा को इन्टरनेट जगत मे लोकप्रिय करने के लिए आपका साधुवाद |

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