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Wednesday, March 20, 2013

राशनकार्ड

`राशनकार्ड`- मुक्त छंद कविता ।


(courtesy-Google images)




न जाने बाबू ने राशन कार्ड से, मेरा  नाम  कैसे  मिटा दिया..!!
 

भूखा  था  कल  तक आज भी,पापी पेट को, मैंने समझा दिया ।


देता रहा रिश्वत,निवाला छिन,बच्चों  के मुँह से, भीखमंगों को, 
 

कहाँ से मिल गया,हाज़मा भारी,रिश्वत देकर, दरिंदे नंगों को ।


निगल  गया  हूँ न जाने कितने,ही कंकर - सड़े गेहूँ के साथ,
 

हज़म कर भी पाऊँगा,या लगेंगे न जाने मुझे और कितने साल?


सौ जन्म भी होंगे कम,ढूंढ पाऊँ जो,खुद  को, इन टूटे आईनों में, 
 

बहते आंसु, आहें, बुझी निगाँहें, ताउम्र कटी, इन लंबी लाईनों में ।


छाया है अंधेरा,बिना तेल मिट्टी के,झोंपड़ी और मेरे  ख़्वाब में भी,
 

आखिरी बार हो दर्ज,नाम राशन में, हो जाए रोशन चिता मेरी? 


न जाने बाबू ने राशन कार्ड से, मेरा  नाम कैसे मिटा दिया..!!
 

भूखा था कल तक आज भी, पापी पेट को, मैंने समझा दिया ।
 

मार्कण्ड दवे । दिनांक - ०५ -०४ -२०११.

Tuesday, July 31, 2012

मेरी मिल्कियत । (गीत)


मेरी मिल्कियत । (गीत)




(सौजन्य-गूगल)


है  तड़पना मेरी मिल्कियत, तुझे छोड़ना है शराफ़त ।

चाहा  था  की  बनी  रहे, दरमियाँ  हमारी ये उलफ़त ।

(उलफ़त = पारस्परिक संबंध ।) 

अंतरा-१

वादा - ए - वफ़ा और कसमें वो, लबरेज़ निगाहें प्यार से..!

मिले आंसू-आंहें,टूटा दिल, लिखी नसीब में  ये विरासत..!

है  तड़पना  मेरी  मिल्कियत, तुझे  छोड़ना है शराफ़त ।

(लबरेज़=लबालब)

अंतरा-२

लिखे  जायेंगे,  अफ़साने    कई,   होंगे  हमारे  चर्चे   भी..!

सब बातें थीं, बातों का क्या? करे कौन हम पर शफ़क़त..! 

है  तड़पना  मेरी  मिल्कियत, तुझे  छोड़ना  है शराफ़त ।

(शफ़क़त =पीड़ित व्यक्ति के साथ दया भाव । )

अंतरा-३

ढूंढता  हूँ   अपने  वारिस  को, पूछता  रहा  मैं अपनों  से ।

चलो, आप से भी पूछता हूँ, क्या है आप का भी अभिमत ?

है  तड़पना  मेरी  मिल्कियत, तुझे  छोड़ना है शराफ़त ।

(अभिमत = विचार,राय )

अंतरा-४.

कुछ  कर  सको  तो अब  यही, दुआ करना तुम  मेरे  यार ।

मिले ना मुझे,प्यार फिर कभी, न हो ज़िंदगी में ये अज़मत ।

है   तड़पना  मेरी  मिल्कियत, तुझे  छोड़ना  है  शराफ़त ।

(अज़मत = चमत्कार ।)

मार्कण्ड दवे । दिनांक-२९-७-२०१२.

Monday, November 14, 2011

मेरे वतन की मिट्टी । (गीत)





मेरे वतन की मिट्टी । (गीत)



मेरे  वतन  की  मिट्टी  कोई  ला दो ।
बचपन के वो पल फिर से लौटा दो ।


अन्तरा-१.


वो  नदिया   किनारे,  पानी  उड़ाना ।
वो   शाम  सुहानी,  सपने  संजोना ।
बालू से  फिर  एक महल  बनवा दो ।

बचपन के  वो पल फिर से लौटा दो ।


अन्तरा-२.


नन्हीं सी बहना पर हुकुम चलाना ।
सताकर उसे  फिर  राखी बँधवाना ।
मेरा  लड़कपन  फिर  से  लौटा दो ।

बचपन के वो पल फिर से लौटा दो ।


अन्तरा-३.



यारों   से   लड़कर   यारी    जताना ।
माँ   को   सताकर   रूठना, मनाना ।
माँ  का  वो आँचल फिर से ओढ़ा दो ।

बचपन  के  वो पल फिर से लौटा दो ।


अन्तरा-४.


रब  का बुलावा,कहाँ अब तो रूकना ।
बिछड़े सभी अब, उनको है  मिलना ।
अपने  कुछ  कंधे, फिर से मँगवा दो ।

बचपन  के  वो पल फिर से लौटा दो ।

मेरे   वतन  की   मिट्टी  कोई  ला दो ।
बचपन  के  वो पल फिर से लौटा दो ।



मार्कण्ड दवे । दिनांकः १४-११-२०११.

Friday, July 15, 2011

आतंकवादी हाय-कु-कथा?

आतंकवादी हाय-कु-कथा?
सौजन्य-गूगल


आतंकवादी हायकु-कथा?


http://mktvfilms.blogspot.com/2011/07/blog-post_15.html

१.

सुबह पूरे
  
थे पापा; शाम लौटे

हैं  टुकड़ों में..!!

२.

छिपे हो खुद,

कमांडो के पिछे यूँ?

बहुत अच्छे..!!

३.

ऐ  सियासत

क्या चाहिए और भी,

जान के सिवा?

४.

मरी है आज,

इन्सानियत एक  

ही, धमाके में?

५.


दिल का कोना

हुआ  लहूलूहान,
  
रोता भी नहीं..!!

६.

मुंबई-कर,


कभी सोता नही है,

लाश बन के..!!

७.

उठेगी आंधी,

कभी तो ढेर होगा,

आतंकवाद?

हे राम..!!

मार्कण्ड दवे । दिनांक-१५-०७-२०११.

Friday, July 8, 2011

जाग बॉसडी.के.आमीर-झाग?

जाग बॉसडी.के.आमीर-झाग?
सौजन्य-गूगल ।

"ये फिल्म बच्चों के लिए नहीं है, हमने वयस्क के लिए ही सेंसर सर्टिफ़िकेट मांगा था..!!"

-सरदार सरोवर फॅम व्यर्थ-आंदोलनकारी,

संत शिरोमणि निर्माता-उस्ताद श्रीआमीरखानसाहब उवाच्..!!


======

प्यारे दोस्तों,

सब टी.वी.पर दिनांक चार जुलाई से, निर्दोष मनोरंजन का एक नया कार्यक्रम,`Happy Housewives Club`, शुरु हुआ है,ये बहुत अच्छी बात है ।

पर,सन-१९९५ में, एक  नये रिकॉर्डिंग स्टूडियो के निर्माण हेतु, जूहु-  मुंबई के इलाके में, एक भवन-लॉकेशन देखने के लिए, कुछ मित्रों के साथ, मैं भी चला गया । उस भवन के मकान मालिक से, स्वाभाविक  बातचीत के दौरान, उनके द्वारा पूछे गए, एक सवाल ने,  हमें बड़ा हैरान कर दिया..!! उन्होंने हमें पूछा," आप यहाँ रिकॉर्डिंग स्टूडियो के बहाने, हाउस-वाइफ़ किटी-पार्टी क्लब, जैसी कोई  ऍक्टिविटी चलाने का इरादा तो नहीं रखते हैं ना?"

ऐसे बेतुके सवाल से, हमें बहुत अचंभा होने के कारण, हमने उनसे जब,ज्यादा जानकारी चाही तब उन्होंने हमें बताया कि,"पिछले कई माह से यह भवन, एक हाउस-वाइफ किटी-पार्टी क्लब वालों को,किराये पर दिया हुआ था । उस क्लब के सदस्यों ने यहाँ, किटी पार्टी के बहाने,`Male Prostitute`‏को हायर करके, `Striptris Dance`-जुआ-शराब और अश्‍लीलता का माहौल खड़ा कर दिया था,जिसके चलते यह स्थान बहुत बदनाम हो रहा था । हालाँकि, मकान-मालिक ने उन सभी  फूहड़ नमूनों  को, दस दिन पहले ही यहाँ से खदेड़ दिया था..!!      

वैसे, हम तो, इस स्थान की, इतनी बढ़िया तारीफ़ सुनते ही, वहाँ से उठ खड़े हुए पर, मेरे मन में भी एक साथ कई सवाल उठ खड़े हो गए..!!

* क्या समाज में,नर हो या नारी, उनके सार्वजनिक  वाणी-बर्ताव की कोई सीमा; सरहद होनी चाहिए?

* अगर हाँ तो, ऐसी सीमा कौन तय करें? कानून? कानून तो ऐसे कई कानून तो मौजूद है ना? इस का अमल कहाँ होता है?

* तो फिर,समाज में नैतिकता के प्रहरी होने का दम भरने वाला कोई सामाजिक-राजनीतिक संस्था या दल, श्‍लील-अश्‍लील की सीमा तय करेगा? हालाँकि, उनमें भी तो कई मत भेद-मन भेद है..!!

मानो मेरे इन सारे सवाल के जवाब मुझे आज ही मिलना तय हो..!! मुंबई से वापस आते समय,मेरे सूरत के एक मित्र ने बहुत आग्रह करके, उनकी मेहमाननवाज़ी के लिए उनके यहाँ एक दिन ठहर ने के लिए आख़िर, मुझे राज़ी कर ही लिया ।

हमारे सूरती-लाला मित्र के घर में, परिवार के छोटे-बड़े,  सभी सदस्य को बात-बात में, बिलकुल स्वाभाविक ढंग से, संत शिरोमणि श्री श्रीआमीरखानजी की नयी फिल्म,`देल्ही बेली` की स्टाइल में, अश्‍लील गालियाँ उच्चारते देख, मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ..!! मित्र को पूछने पर पता चला कि,सूरत शहर में, इन शब्दों को अपशब्द  न  मान कर, मन की भड़ास निकालने वाले, आम व्यवहार के शब्द माने जाते हैं..!!

मेरे मित्र ने, अपने अलग कमरे में,  रात को, करीब नौ बजे, टाईम-पास करने के लिए, सन-१९९४ में रिलीज़ हुई, सुप्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक श्री शेखर कपूर जी की,`दस्यू सुंदरी फूलनदेवी`, की जीवन गाथा पर आधारित हिन्दी फिल्म,`बैन्डीट क्विन` की सी.डी; सी.डी. प्लेयर पर लगाई, मगर ये क्या?

हमें कोई फिल्म निहारता देख कर, मेरे मित्र के करीब दस और बारह साल के दो बच्चें भी, हमारे साथ कमरे में आ कर, उत्सुकता वश फिल्म देखने बैठ गए..!! उन बच्चों की ज़िद के आगे मेरे मित्र भी लाचार हो गए?

दोस्तों, अब आप को ये तो पता ही है कि, फिल्म,`बैन्डिट क्विन`में वास्तविकता दर्शाने  हेतु, निर्देशक ने कुछ बोल्ड दृश्य भी फिल्माये हैं?

मेरे मित्र के दस-बारह साल के दोनों बच्चों ने(पुत्र-पुत्रीने) इस फिल्म में आते, गाली गलोंच के दृश्य तक तो फिल्म  देखने की हिम्मत जुटा ली पर, जैसे ही फिल्म की नायिका पर बलात्कार का संपूर्ण नग्न दृश्य आया कि तुरंत, उन दोनों बच्चों के ध्यान में ये बात आ गई कि, उनके  पापा यह फिल्म साथ बैठ कर देखने से मना क्यों कर रहे थे, अतः  दोनों बच्चे, बिना कुछ कहे सुने ही, कमरे से चुपचाप  बाहर चले गए ।

समझदार बच्चों की, यह हरकत देख कर, मुंबई से मेरा पिछा कर रहे, मेरे मन में उठे, कई सारे सवालों के जवाब, मानो सूरत में ही मुझे मिल गए..!! और " सार्वजनिक  वाणी-बर्ताव की सीमा कौन तय करे?" इस प्रश्न का जवाब है..!!

"आयु में, छोटे हो या बड़े, नर हो या नारी, जो बात अपने आत्मा को रास ना आयें-अपने मन को ना भाये, वह सारे शब्द-बात अश्‍लील है । ऐसे शब्द-बात बोलने-सुनने के लिए, अपने मन-आत्मा के द्वारा, जो सरहद; सीमा बाँधी जाएं, वही सीमा प्रत्येक इन्सान के लिए सत्य होती है ।"

हालाँकि, ये शब्द के श्‍लील-अश्‍लील माने जाने की सीमा, देश-विदेश की संस्कृति और संस्कार-परंपरा के अनुसार भिन्न-भिन्न ज़रूर हो सकती है । एक आश्चर्यजनक बात यह भी है कि, भारत की सभी भाषाओं के कुछ अप शब्द अगर अंग्रेजी में उच्चारे जाएं, तो वह बकवास  अपशब्द  उच्चारने वाला व्यक्ति, साक्षर के तौर पर, समाज में  सर्वाधिक मान पाता  है? 

वैसे, यह भी देखा गया है कि, हमारे ही देश के भिन्न-भिन्न राज्यों में, कोई एक शब्द, एक प्रदेश में, जहाँ अपशब्द माना जाता है, वही अपशब्द दूसरे किसी प्रदेश में, आम व्यवहार के चलन का शब्द माना जाता है?

अगर इस उदाहरण को ध्यान में रखें तो, हमारे देश के कई राज्यों के लिए वरदान समान, गुजरात के, महाकाय सरदार सरोवर नर्मदा बांध के विरूद्ध, बिना कुछ सोचे-समझे, इस बाँध से होनेवाले कल्याणकारी लाभ का कोई अभ्यास किए बिना, उस वक़्त रिलीज़ होने वाली, अपनी फिल्म,`फ़ना` को, बॉक्स ऑफ़िस लाभ पहुँचाने  के लिए, नर्मदा बाँध विरोधी आंदोलन का समर्थन करके, गुजरात की जनता का आक्रोश बटोरने वाले, मिस्टर परफॅकनीस्ट, श्रीआमीरखान ने,अपनी इमेज से विपरीत, अपने भान्जें अभिनेता ईमरानखान की कैरियर को ज़ोर का धक्का देने के लिए,`Cunning आमीर मामूँ-फ़्लॉप इमरान भान्जे ने, सारे दर्शकों कों `चू..बीप..या = मामूँ` बनाने के लिए, `दिल्ही बेली` का निर्माण किया है? 

ऐसे में, जब इस फिल्म की जब चारों ओर से प्रशंसा या कड़ी आलोचना हो रही है तब, इस फिल्म को कितनी गंभीरता से लेना- ना लेना, फिल्म श्‍लील है या अश्‍लील, इस बात की सीमा, फिल्म देखने वाले छोटे-बड़े सभी दर्शकों को, अपने मन-आत्मा की आवाज़ सुनकर, उसके मुताबिक सरहद का फैसला करना चाहिए..!!

यहाँ छोटे-बड़े सभी दर्शक इसलिए लिखा है कि, इस विवादित फिल्म की पायरेटेड सी.डी. कुछ ही दिनों में बाज़ार में उपलब्ध हो जाएगी, जिसकी एक कॉपी-लिंक्स आज भी नेट पर उपलब्ध है ।

पार्ट-१.
http://movzap.com/332euk14f3rb.html
पार्ट-२.
http://movzap.com/ncwyn0d0385b.html
पार्ट-३.
http://movzap.com/nzkwsoxvc5d0.html
पार्ट-४.
http://movzap.com/3pqjguog05eo.html
पार्ट-५.
http://movzap.com/hrrn310bsnba.html
पार्ट.६.
http://movzap.com/ycyzj73336b6.html

ज़ाहिर है ऐसे में १८ साल से कम आयु के बच्चें भी चोरी छिपे इस पायरेटेड कॉपी को अवश्य निहारेंगे? ऐसे में, हमेशा की तरह, आमीरखान का यह सार्वजनिक स्टेटमेन्ट बेकार-बेअसर हो जाएगा कि," हमने यह फिल्म का `A` सर्टिफ़िकेट लिया हुआ है?"


सच तो यह है कि,आमीरखान की`सरफ़रोश`;`तारे जमीँ पर`,जैसी फिल्मों की कलात्मकता के अनुरूप,`देल्ही बेली` फिल्म नहीं है । मानो, उस असली आमीरखान को, उसकी दूसरी बीवी (निराशा की) किरन और फ़्लॉप ऍक्टर भांजे इमरान ने हाईजैक कर लिया हो..!!


एक  टी.वी. साक्षात्कार में आमीरखान ने दावा किया है कि,`देल्ही बेली` फिल्म की स्क्रिप्ट ओरिजिनल है ।


आमीरखान के टी.वी,साक्षात्कार कि लिंक-


http://www.youtube.com/watch?v=YjtSJCbtaXw&feature=relmfu


आमीरखान का यह दावा  कि,`देल्ही बेली` फिल्म की स्क्रिप्ट ओरिजिनल है, ये बात बिलकुल सत्य से परे है क्योंकि, यह फिल्म, सन-२००९ में रिलिज़  हुई अंग्रेजी फ्लॉप फिल्म,`Next Day Air`,पर आधारित है यहाँ तक की, उसके कई  सेट और सीन भी हूबहू कॉपी किए गये हैं?  आमीरखान जैसे मंजे हुए कलाकार से, दर्शकों को, इतने बड़े छल-कपट की, शायद उम्मीद नहीं थी..!!

फिल्म,`Next Day Air`, की लिंक-  

http://www.novamov.com/video/4d8f7bd6b9c85

हालाँकि, कई सारे निर्माता-निर्देशक-अभिनेता-अभिनेत्री, फिल्म उद्योग में अमाप सफलता प्राप्त करते ही, प्रयोगशीलता के नाम फूहड़ फिल्मों का निर्माण करते हैं, जिनमें से एक,`देल्ही बेली` भी है..!!

यह फिल्म देखने के बाद, दर्शकों को लगता है कि, आमीरखान अपनी `निराशा की` किरन खान बीवी के प्रभाव में आकर, उसके कहने या स्क्रिप्ट पढ़ कर हँसने पर, अंटसंट फ़ालतू फिल्म निर्माण करके, ये साबित करने पर तुले हैं कि,वह साठ साल के होने से पहले ही सठिया गये हैं?

ये निश्चित है कि, प्रयोगों के नाम पर समाज में क्षोभ पैदा करने वाली ऐसी फिल्में  देखकर ही दर्शक,अतिरिक्त रू.१०० खर्च करके, पॉपकोर्न-पॅप्सी खा-पी कर, इतने बड़े घोर अपराध का घोर प्रायश्चित  करता होगा..!!

अगर आमीरखान, आने वाले समय में भी, बीवी किरन और इमरान के इशारों पर,`देल्ही बेली`,जैसी बकवास फिल्म निर्माण करते रहेंगे, तो बॉक्स ऑफ़िस पर उनकी सभी फिल्म, एक न एक दिन  पीट ने लगेगी और उन्हें भी रामगोपाल वर्मा की तरह, अपने साथी कलाकारों पर,`देल्ही बेली` की अश्‍लील भाषा में ट्वीट करना पड़ेगा?


हमारे पड़ोसी शर्माजी का कहना है कि," आमीरखान इस फिल्म में रुपया ज़रूर कमायेगा, पर `गोविंदा-डेविड धवन-शक्तिकपूर` स्टाईल की  फूहड़ कॉमेडी परोस कर, दर्शकों का विश्वास खो देगा..!!  अगर  विदेशी फिल्मों से स्टोरी-आइडिया चुरा कर, निर्माण किए गये प्रयोग ऐसे ही होते हैं  तो, भोजपुरी या फिर, मराठी मानुष दादा कोंडके कि, `अंधेरी रात में दिया तेरे हाथ में`, जैसी फिल्मों को,`देल्ही बेली`से बेहतर मानना चाहिए, कम से कम उसमें अपनी मिट्टी की ख़ुशबू तो होती है..!!"

शर्मा जी ने तो आक्रोशित हो कर ये तक कह दिया, " सरकाई लो खटिया जाड़ा लगे- जैसे गानों के लिए, गोविंदा अंकल और करिश्मा आंटी ने, छोटे-बड़े  सभी दर्शकों से माफ़ी मांगी थी, क्या आमिरखान इस बकवास फिल्म के लिए, दर्शकों से माफ़ी माँगेंगे?"

यहाँ, एक स्पष्टता ज़रूरी है कि, जैसे आमीरखान अपने फिल्मी प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र है, इसी प्रकार शर्मा जी जैसे दर्शकों को भी अपने विचार व्यक्त करने की आज़ादी है ।

वैसे,श्रीशर्मा जी की यह भड़ास, कई लोगों को सही लगेगी,क्योंकि, अपनी हर एक फिल्म को `ऑस्कार ऍवोर्ड` के लायक समझने बाले, आमीरखान, इस फिल्म को `ऑस्कार` में नोमिनेट करा के `ऑस्कार ऍवोर्ड` के लिए मरणासन्न प्रयास करेंगे?  

अभी-अभी न्यूज़ चैनल पर एक ब्रेकिंग न्यूज़  फ्लैश हो रहा है,"जयपुर की मेडिकल कॉलेज के स्वर्गवासी प्रिसिंपल श्रीरामेश्वर शर्मा जी ने अपनी ५० साल की डॉक्टरी सेवाओं के बाद, डॉक्टरी पढ़ रहे छात्रों के अभ्यास के उम्दा हेतु, अपने मृत्युपश्चात, देह दान किया था, पर`सवाई माधोसिंह अस्पताल` के सत्ताधिशों की लापरवाही से, उनका मृत देह, छात्रों के काम न आ कर, वहाँ बस रहे, असंख्य माँसाहारी चूहों का पापी पेट भरने के लिए काम आया..!! जी..हाँ, उन माँसाहारी चूहों ने स्वर्गस्थ श्रीरामेश्वर शर्मा जी के शव को बुरी तरह कुतर खाया..!!"

यह समाचार देखकर, मुझे प्रतीत हो रहा है कि, आदरणीय श्री दादा साहब फाल्के से शुरू हुई, हमारी फिल्म उद्योग की महान धरोहर, जिसे बाद में, श्रीसत्यजित राय, श्रीबासुचेटरजी, श्रीऋषि `दा, श्रीगुरूदत्त जी और न जाने कितने तपस्वीओं ने अपने तप से, संभाले रखा, नवपल्लवित किया, उसे अपने मृत्युपश्चात, हमें दान किया..!!  

उस महान धरोहर को, भली भाँति सँभाल ने के बजाय, आमीरखान-किरन खान और रामगोपाल वर्मा, जैसे कलाभक्षी माँसाहारी चूहें मिलकर अपना पापी पेट भरने के लिए, चारों ओर से फूँकते हुए, बुरी तरह कुतर रहे हैं..!!

हम लाचार हैं क्योंकि इस देश का सेंसर बोर्ड भी, सरकार के मंत्रीओं की तरह भ्रष्ट हो चुका है?

हम तो,आमीरखान को भी चेता रहे हैं,`जाग बोस.डी.के.आमीर झाग..!! वर्ना जब दर्शक जाग जायेंगे तो, कहना पड़ेगा,`भाग बोस.डी.के.आमीर भाग, साबुन की शक्ल में तु तो निकला केवल झाग?"

अब मैं तो यहाँ विराम ले रहा हूँ, पर आप अपनी प्रबुद्धतापूर्ण  टिप्पणी  करने  के  लिए  मत  रूकना..!! 

http://mktvfilms.blogspot.com/2011/07/blog-post_08.html

मार्कण्ड दवे । दिनांक-०८-०७-२०११.

Friday, July 1, 2011

पावली की पदोन्नति । Part- 2.


पावली की पदोन्नति । 
Part- 2.
सौजन्य-गूगल ।

प्यारे दोस्तों, पार्ट-१ में आपने पढ़ा था..!!

" अ..हा..हा..हा..!! सन-१९६० में, एक दिन रास्ते पर किसी की खोई हुए, एक चवन्नी मुझे अनायास मिल गई और सभी घरवालों से छिपा कर, उस चवन्नी से, मैंने चार दिन तक, जो जल्से किए थे..!! अ..हा..हा..हा..!! आज भी उसे, याद कर के मेरा दिल गदगद हो उठता है..!!"

अब आगे पार्ट-२..!!

सन-१९६० की साल में, हमारे गाँव में, हमारी जाति के व्यापारी के अलावा, किसी दूसरे की दुकान से तैयार खाद्य सामग्री मँगवाना, हमारे परिवार में वर्ज्य था । इसे आप उस ज़माने की रूढिचूस्तता भी मान सकते हैं । 

ऐसे में , चार दिनों तक रास्ते से, मुफ़्त में मिली हुई, चवन्नी का छूटा करा कर चार दिन तक, एक-एक, दो-दो  पैसा खर्च करके, उस ज़माने के,`जंगली-हूण-अनार्य` लोगों की ख़ूराक माने गये खाद्य पदार्थ, जैसे कि, पाँव भाजी वाले  मीठे पाँव-बिस्किट-नानखटाई-चॉकलेट-जिनतान कंपनी की छोटी-छोटी मीठी  गोली  इत्यादि, ज़िंदगी में पहली बार चूपके से, बड़े ही चाव से चखे थे । 

मैं अगर सच कहूँ तो, उन चीज़ों का स्वाद, मेरे  दिल में कुछ इस हद तक,  घर कर गया है कि, स्वाद आज भी  वैसे  का  वैसा ही है..!! ठीक है, अपने खुद की मेहनत के कमाये रूपये से, ये सभी चीज़ें आज कल खा-पी रहे हैं, पर वह फूकट की चवन्नी जैसा स्वाद अब उनमें  कहाँ..!!

मेरा एक दोस्त, स्वर्ण कार का लड़का भी था । उसके पिता को मैं अक्सर पागल मानता था क्योंकि, इतनी मूल्यवान चवन्नीयों को, किसी धातु की पट्टी पर टांका लगाकर, लड़कियों के  सिर के बाल बाँधने के लिए वह बक्कल बनाते थे..!! 

शायद उनको पता न था कि, इतनी सारी चवन्नीयों से, कितने सारे मीठे पाँव-बिस्किट-नानखटाई-चॉकलेट-जिनतान कंपनी की छोटी-छोटी मीठी  गोली  इत्यादि, खरीदे जा सकते थे?

हमें पाठशाला में, प्रारंभिक कक्षा की किताबों में पढ़ाया गया है कि, " किसान जगत का तात कहलाता है ।" पर, इस निकम्मी सरकार ने, सभी के परम पूज्य पिता  श्री किसान जी को पूछे बिना ही, चवन्नी रद्द कर दी? अब किसान उनके खेत में, `चार आना या सोलह आना`, कितने आना फ़सल पैदा हुई, ये कैसे बता पायेंगे?

चवन्नी रद्द होने से,एक और कठिनाई पैदा हुई है?समाज में जिन लोगों का, शारीरिक हिलना-डुलना शंकास्पद है, (गॅ टाइप?) उनके कई  उप-नामों  में  से,  एक  लोकप्रिय उप-नाम `चवन्नी छाप`को, उनकी सहमति लिए बिना, सूची से कम  कर देना, शर्मा जी के मत अनुसार ठीक बात नहीं है? 

हालाँकि, उस  वक़्त उम्र में, मैं  बिलकुल छोटा होने के कारण,` पावली छाप` उप-नाम का भावार्थ मेरी समझ से परे था..!! पर, एक दिन ऐसा वाक़या हुआ कि, मेरी समझ में कुछ-कुछ भावार्थ, अपने आप आ गया । 

हुआ यूँ  कि, हमारी गली में, खाते-पीते घर का, पहलवान टाइप का, करीब पंद्रह साल का, एक  लड़का, उसके  कुछ दोस्तों के साथ, गली  में  क्रिकट खेल रहा था । उसने  हमें  डरा  कर, वहाँ से  भगाने  के  लिए, हमारी नन्ही वानर सेना में से, एक बच्चे को, धक्का दे कर ज़मीन पर गिरा दिया । 

पता नहीं, हमारी वानर सेना में, कैसे और कहाँ से, एकाएक  इतनी  ताक़त आ गई कि, सभी बच्चों ने मिलकर, उस पहलवान लड़के की टाँग खींच कर, उसे भी ज़मीन पर गिरा दिया और सब ने मिल कर उसे थोड़ा पिटा भी..!!

वैसे, उस लड़के की, ये पिटाई कांड के बाद, सभी बच्चों को डर लगा, अब ज़मीन से उठ कर, कहीं ये पहलवान, हम सब बच्चों की धुलाई शुरू न कर दें..!! 

पर हमारे आश्चर्य के बीच, हम से कई गुना बलवान, वो पहलवान ज़मीन पर लेटे-लेटे, रोते-रोते, उसकी मम्मी को, ज़ोर से आवाज़ दे कर सहायता के लिए बुलाने लगा..!! 

उस दिन से इस पहलवान को पछाड़ने का, गौरव महसूस करते हुए, सारे बच्चे, उस पहलवान को, `पावली-पावली` कहकर बुलाने लगे और मेरी समझ में कुछ-कुछ आ गया कि,जो बिना वजह किसी से भीड़ जाते हैं और फिर किसी के धक्का देने पर, ज़मीन पर गिर कर, रोते-बिलखते,सहायता के लिए अपनी मम्मी को बुलाते हैं, वे सब `पावली छाप` कहलाते होंगे?

मेरी समझ में यह भी आ गया कि, अपने दुश्मन को निर्बल समझ कर, अपनी क्षमता पर अति आत्मविश्वास जता कर जो लोग, बिना सोचे-समझे, किसी से भीड़ जाते हैं, वे सारे ज़मीन पर औंधे मुँह गिरते हैं और उन्हें अपनी, मम्मी-पापा-नानी याद आ जाते हैं..!! 

उस दिन के बाद, मैं तो कभी, किसी से आजतक भीड़ा नहीं  हूँ..!! 

पर हाँ, बिना सोचे-समझे, बाबा रामदेवजी सरकार से भीड़ गये? 

हाँ, भीड़ गये..!! 

बाबा जी के समर्थकों को आधी रात में खदेड़ने के कारण, सरकार  जनता से भीड़ गई?

 हाँ, बूरी तरह भीड़ गई..!!

अब, सोलह अगस्त से, जंतर-मंतर पर,आमरण अनशन पर  बैठ कर श्रीअण्णा हज़ारे जी, सरकार से भीड़ने वाले हैं? 

शायद..हाँ..,अब आगे-आगे देखिए होता है क्या? 

वैसे, हमारे शर्मा जी आज आध्यात्मिक प्रति भाव देने के मूड में है और मुझे अभी-अभी समझा रहे हैं कि," इन सारी बातों पर, आप क्यों व्यर्थ में, अपना खून जला रहे हैं, जो भीड़ता है, उन्हें भीड़ने दो ना? 

ये सब पहले से तय होता है । हम सब तो रंगमंच की कठपुतलियाँ है, जिनकी डोर उपर वाले के हाथ में हैं..!! 

और रही चवन्नी रद्द होने का मातम मनाने की? 

तो ये समझो कि, जिस प्रकार, हम अलग-अलग शरीर रूप धारण करते हैं मगर, सभी प्राणी में आत्मा एक ही है, उसी प्रकार, सिक्के का नाम, चवन्नी हो, अठन्नी हो या रुपया हो, क्या फर्क पड़ता है..!! उन सभी सिक्कों में  धातु  तो  एक जैसी  ही  है  ना? और फिर कोई इस दुनिया से चला जाता है, पर वह, अपने अच्छे-बूरे कर्मों से, हमेशा सब के दिल में बसा रहता है कि नहीं..!!

सच तो ये है कि,पावली कभी मरती नही, पावली मर सकती ही नहीं, बहुत जल्द ही, दूसरा रूप धारण करके, पावली हमारे दिल में...सॉरी जेब में, एक ना एक दिन जरूर वापस आएगी..उसके जाने का मातम मनाना, अच्छी बात नहीं है..!!"

वाह, शर्मा जी,वा..ह..!! 

या...र...!! शर्मा जी की बात तो पते की है..!! है कि नहीं? आपको क्या लगता है? 

ताज़ा नोट- अभी-अभी मुझे पता चला है कि, इतना फ़ालतू आलेख लिखते-लिखते, मेरे दिमाग से मेरी, एक चवन्नी कहीं खो गई है, आप उसे ढूंढने में सहायता करेंगे, प्ली..ज़..!! धन्यवाद ।

॥ इति श्री भरत खंडे, पावली पुराण,अंतिम अध्याय संपूर्णम् ॥ 

सब मिल, बोलो जय श्री,`जय-जय पावली परमात्मन्..!! जय-जय हिन्दुस्तान..!! मेरा भारत महान?`

मार्क्ण्ड दवे । दिनांक-०१-०७-२०११.

Thursday, June 30, 2011

पावली की पदोन्नति । Part- 1.


पावली की पदोन्नति । 
Part- 1.

सौजन्य-गूगल

बताइए ना, बेकसूर रुपया  कितना अखण्ड था?
पावली  छाप कहलाया  वह, पाखंडी  होते  ही ..!!"

पावली= कमअक्कल, बुद्धिहीन ।
                                                                         
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"क्यों दवेजी, आपको क्या लगता है? काले धन के विरुद्ध चल रहे आंदोलन के चलते, सरकार, ५०० और १००० रूपये के नोट रद्द कर  देगी?" अधिक मूल्य की नोट रद्द होने के भय से कांप रहे एक मित्र ने मुझ से सवाल किया ।

चेहरा गंभीर करके, किसी महान चिंतक की अदा में, मैंने उत्तर दिया,"पता नहीं, पर  इतना ज़रूर है कि, हमारे महान भारत में, काला धन और भ्रष्टाचार, अगले  ५०० या १००० साल तक, मिटने वाले नहीं है..!! चाहे  कोई  कितने ही आंदोलन क्यों न करें?"

ड़री हुई आवाज़ में, मित्र ने फिर सवाल किया," क्यों? आप ऐसा क्यों कहते हैं?"

मैंने उन्हें विस्तार से समझाया," देखिए,अण्णा हज़ारे, मानो सच्चे मन से लोक पाल बील को भले ही अमल में लाना चाहते हो पर, उनकी बढ़ती उम्र को ध्यान में रखते हुए,ज्यादा दिन तक उपवास करना, उनके स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है और रही बाबा रामदेवजी की बात तो, ३० जून २०११ से चवन्नी (पावली) को चलन से हटा कर सरकार ने, आंदोलनकारीओं और देश की जनता को,अपनी शुद्ध नियत का परिचय करा दिया है..!! आज चवन्नी रद्द हुई है, कल को ५००-१००० के नोट भी रद्द हो सकते है? चवन्नी से ५००-१००० तक की सफर तय करने में, थोड़ा वक़्त तो लगता ही है ना?"

मित्र को लगा, उनकी गंभीर बात को मज़ाक में लेकर,   मेरी बातों से, मैं उन्हें उलझा रहा हूँ, अतः  मुझ से थोड़ा नाराज़ होकर, स्वतः कुछ बड़बड़ाते हुए, वह अपने रास्ते चल दिए ।

पर, मुझे ऐसा महसूस होने लगा मानो,`पावली-पावली-पावली` कहते हुए,   मेरे दिमाग पर, रद्द की गई चवन्नीओं को पिघलाकर बनायी गई, छोटी सी हथौड़ी  कोई पीट रहा है..!!

मेरे मन में, रह-रह कर एक ही सवाल उठ रहा है," चवन्नी रद्द करके सरकार ने चवन्नी का अधःपतन किया या उसकी पदोन्नति कि?"


हालाँकि, हमारे पड़ोसी शर्मा जी का मानना है कि," चवन्नी का प्रोमोशन कैसे हुआ? दवे जी, आप ही बताईए ना, आजकल चवन्नी में क्या मिलता है? चवन्नी में, सब्जी वाला, हरा धनिया-मिर्ची देने से भी इन्कार कर देता है..!!  क्या अण्णा हज़ारे जी और बाबा जी ने इतना बड़ा आँदोलन, चवन्नी रद्द कराने के लिए, आरंभ किया है? सच बात तो यह है कि, काला धन नाबूद करने के लिए, आंदोलन कर रहे सारे आंदोलनकारीओं को, सरकार ने ये संदेश दिया है कि, आपके इस फालतू आँदोलन की हैसियत, हमारे दिल में सिर्फ एक चवन्नीभर ही है..!! अब बताइए, ये तो पावली का  सरासर पतन हुआ है कि नहीं..!!"

दोस्तों, छोड़ो यार शर्मा जी को..!! वो तो कभी सकारात्मक सोचते ही नहीं है..!!

पर, मुझे तो लगता है कि, सरकार अब रद्द की गई सारी चवन्नीओं को पिघलाकर, उसे एक नये रूपये का रूप प्रदान करेंगी, इसका सीधा अर्थ यही हुआ कि, चवन्नी अब एक रुपया कहलाएगी?  पावली का एक रूपये में रूपांतर,उसका प्रोमोशन हुआ की नहीं? आपके चेहरे की मुस्कान बता रही है कि, आप मेरी बात से सहमत है..!! जनाब, अब आप ही बताइए, मेरी बात में दम है कि नहीं? हैं ना..!!

अरे, मैं तो ये भी मानता हूँ कि, पावली का प्रोमोशन करके सरकार ने, अपने हित में भी, एक बहुत बड़ा कदम उठाया है..!! अब आप पूछेंगे, कैसे?

वह ऐसे कि, काला धन और भ्रष्टाचार,पाकिस्तानी आतंकवाद, अमेरिका की दादागीरी के सामने घूटने टेकने वाली और मर्दानगीपूर्वक उनसे निपटने में अभी तक नाकामी का आरोप झेल रहे प्राइममिनिस्टर श्री मनमोहन सिंह जी और उनकी यु.पी.ए. सरकार को, सारा देश प्रकट या दबे स्वर में, `पावली छाप सरकार- पावली छाप सरकार` कह कर, उनका मज़ाक उड़ाते थे..!!

अब,ऐसे नारों से ख़फ़ा हो कर,थक-हार कर, सरकार ने, चलन से पावली को ही हटा दिया? मानो पूरे देशवासीओं को सरकार, ठेंगा दिखाते हुए, ये कह रही हो," हे..फटे दिमागवाले, निकम्मे-बेकार-नालायक आँदोलन कारी देशवासीओं, जाओं हमने चलन से पावली को ही मिटा दिया है, अब हमें `पावली छाप सरकार` कैसे कह पाएंगे? रामजी झूठ न बुलवाए..!! आज के बाद किसी को ये हक़ नहीं रहेगा कि, सारी सरकार को कोई `पावली छाप-पावली छाप सरकार` कहकर पुकारें? " 

वैसे, सरकार के पावली मिटाने के ऐतिहासिक फैसले का,समर्थन फ्रान्स की विख्यात कला संरक्षक लॅडी `मेरी एन.डी.विची` (१६९६-१७८०) ने भी किया है,

" The distance dosen`t matter; it is only the first step that is difficult." 

अर्थात्- दूरी कितनी लंबी है, इसका महत्व नहीं है, उस फ़ासले को मिटाने के लिए पहला कद़म उठाना, वही मुश्किल होता है..!!



अब जब, फ्रांस की इतनी बड़ी हस्ती,`मेरी एन.डी.विची` ने, यु.पी.ए. सरकार के समर्थन में, उस  ज़माने  में अगर,  इतनी बड़ी बात कह  दी थीं तो फिर, उस  लेडी  के  कथन  का  मान रखते  हुए, हमारे महान देश के सभी फटे दिमाग वाले, निकम्मे-बेकार-नालायक आँदोलनकारी देशवासीओं को, अपना आँदोलन अब  यह समझ कर स्थगित कर देना चाहिए कि, सरकार ने अपनी सच्ची निष्ठा-मन सा जताते हुए, चवन्नी से, १००० रुपये के नोट रद्द करने, जैसी  मुश्किल सी लगने वाली सफर  की,  लं...बी, दू..री  को तय करने हेतु, आज चवन्नी रद्द कर के, जब पहला कदम सफलतापूर्वक  उठा ही लिया है तो, कल यही सरकार ५००-१००० के नोट भी निरस्त कर देगी..!! फिर इसी सफर में, निरस्त होने की बारी होगी  भ्रष्टाचार की, फिर आयेगा काला धन, फिर आतंकवाद, फिर पाकिस्तान, फिर आयेगा अमेरिका, फिर...?

फिर आगे क्या?  इस महान देश की, महान सरकार के बारे में,अच्छी-अच्छी बातें, क्या मैं  अकेले ही  थोड़े ही ना सोचूँ? आप, अपना खुद का दिमाग कब लड़ायेंगे..!!

वैसे, हमारे शर्मा जी कहते हैं," पावली रद्द होने से, भिख़ारीओं को बड़ी राहत पहुँचेगी..!!"

चौकन्ने हो हर, आसपास देखते हुए, मैंने उन्हें चेताया," या..र, ज़रा ध्यान से..!! कोई सुन लेगा, नेताओं को भिख़ारी का उप-नाम हम नहीं दे सकते,हमारा हाल भी बाबा जी और उनके समर्थकों जैसा हो सकता है..!!"

शर्मा जी ने कहा," मैं तो, उन सच्चे भिख़ारीओं के बारे में, कह रहा हूँ, जो मंदिर के बाहर बैठ कर सचमुच भीख माँगते हैं..!! उनको भीख में, कोई चवन्नी देता था तो उन्हें अपमान सा महसूस होता था,अब वे लोग ज्यादा अपमानित होने से, बच जाएंगे?" शर्मा जी की बात बिलकुल सही है । शर्मा जी तो भिखारीओं की बात करते हैं?

एकबार, मैं और शर्मा जी  रेस्त्रां में चाय-नाश्ता करने गये। डटकर नाश्ता करने के बाद  वेटर, एक प्लेट में चाय-नाश्ते का बिल लेकर आया और शर्मा जी के सामने रख दिया । बिल देख कर, कंजूस शर्मा जी ने जेब से बिल जितनी ही रकम निकाली और प्लेट में  रख दी । ये देख कर मैंने, शर्मा जी को जब टोका," शर्मा जी, वेटर को टिप भी देना चाहिए..!!" तब  शर्मा जी ने, प्लेट में अलग से, एक चवन्नी  टिप के तौर पर  रख दी..!!

अब तक चेहरे पर मधुर सी मुस्कान बिखेरते हुए, शांत सा विनयी दिखने वाला वेटर, चवन्नी की टिप देखकर शर्मा जी पर भड़क उठा और तिरस्कार के भाव धारण कर, अपने चेहरे को विकृत करते हुए, प्लेट से चवन्नी उठा कर शर्मा जी के हाथ में वापस थमा दी..!!

मुझे बहुत शर्म महसूस हुई, पर शर्मा जी ने बिना शर्माये, चवन्नी जेब में रखी और उठ कर रेस्त्रां से बाहर आ गए..!!

मेरे कहने का मतलब सिर्फ ये है कि,भिखारी हो,वेटर हो,व्यापारी हो या फिर, छोटा सा बच्चा, इस असहनीय महँगाई में,आजकल पावली इतनी पवित्र हो चुकी थीं कि,कोई भी समझदार,पापी देशवासी,अपने पापों से मलिन हुए  अपवित्र हाथ से, पवित्र पावली को छूने की हिम्मत तक नहीं जूटा पा रहा था?



वैसे, या...र..!! पावली का अधःपतन हुआ हो या पदोन्नति हुई हो, हमको अब क्या लेना-देना..!!

पर ये बात तो सच है कि, आज़ादी के तुरंत बाद, इन पावलीओं का भी एक ज़माना था..!!

अ..हा..हा..हा..!! सन-१९६० में, एक दिन रास्ते पर किसी की खोई हुए, एक चवन्नी मुझे अनायास मिल गई और सभी घरवालों से छिपा कर, उस चवन्नी से, मैंने चार दिन तक, जो जल्से किए थे..!! अ..हा..हा..हा..!! आज भी उसे, याद कर के मेरा दिल गदगद हो उठता है..!!

आपको जानना है? मैने उस चवन्नी से क्या-क्या खरीदा और फिर आगे क्या हुआ था?

तो फिर तैयार हो जाइए, इस आलेख की अगली कडी-पार्ट-२ में हमारी-आपकी रोचक चवन्नी-कहानी को हम आगे बढ़ाएंगे..!!

दोस्तो, मेरे हमउम्र कई विद्वान दोस्तों ने कभी न कभी इस पवित्र पावली को जरूर सहलाया होगा, आपको उस पवित्र पावली कसम है एक बार सब मिल ज़ोर से नारा लगाएं..प्ली..ज़..!!

`जय-जय पावली परमात्मन्..!! जय-जय हिन्दुस्तान..!! मेरा भारत महान?`


मार्कण्ड दवे । दिनांक-३०-०६-२०११.

Monday, June 27, 2011

`शिकारी` कथा-रहस्योद्धाटन ।

रहस्य कथा-शिकारी ।
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सौजन्य-गूगल

दोस्तों,एक छोटा सा  पक्षी, विशालकाय विमान को आसमान से धरती पर गिरा सकता है..!! एक छोटी सी चींटीं विशालकाय हाथी को पागल बना सकती है..!! और मन के भीतर, पैदा हुआ वासना का एक छोटा सा कीड़ा,किसी भी महा चरित्र्यवान मानव को पतन की खाई में धकेल देता है..!!

 
पिछले कई दिनों से, शिकारी को इसका नया शिकार हाथ न आया था । कई दिनों से वासना और विक़ार के नशे की अपूर्तता के कारण इस शिकारी को, एक नशाख़ोर व्यसनी की छटपटाहट से  भी अधिक बैचेनी आज हो रही थी । वासना के कारण गरम हो कर दौड़ रहे खून में अब भयंकर उछाल आने की तैयारी थी ।

 
हा..क्..थू..उ..उ..!! शिकारी ने अश्लीलता पूर्वक, रास्ते पर थूक दिया । शिकारी का मन बचपन की यादों से, खट्टा होने लगा..!!

 
बचपन से ही, १२` x १५` फुट के सिर्फ एक कमरे के कायमी निवास में, पूरा खान दान रहता था, ऐसे में कभी-कभी तो उसके सो जाने का  भी इंतज़ार किए बिना ही, उसका बड़ा भाई और भाभी रात को शारीरिक छेड़छाड़ के साथ  सेक्स  की मस्ती का जो खेल शुरु कर देते थे, उसे वह पहले-पहल तो अचरज वश हो कर और बाद में, कमरे में फैले धुँधले प्रकाश में, अध-खुली  आँख से उन दोनों की सेक्सी शरारतों की चरम सीमा को देख कर, वह वयस्क  होता रहा ।

 
हद तो तब होने लगी, जब  उसने बड़े भाई-भाभी की सेक्सी शरारतों की आज़माइश विद्यालय के पायखाने मे, अपने विद्यालय के सहपाठीओं के साथ करनी शुरू कर दी..!! ज़ाहिर है कि, इस गंदी हरकतों की शिकायत  प्रधानाचार्य, उसके भाई से बार बार करने लगे..!! 

 
नतीजन एक दिन आखिर थक-हार कर, बड़े भाई ने उसे विद्यालय से एकाएक नाम कटवा कर, पढ़ाई छुड़वा  दी और नज़दीक के शहर में, एक कारखाने में, उसे मज़दूरी पर भेज दिया ।

 
कारखाने के मालिक को तो मानो चौबीसों घंटे का नौकर मिल गया, उसे रहने के लिए कम्पाउन्ड में ही, मालिक के बंगले के पिछे, एक छोटा सा कमरा शेठ ने दे दिया । पूरा दिन  कारखाने और बंगले का ढेर सारा काम करने के बाद  बदन असह्य  दर्द करने लगे तब, शेठानी का दिया हुआ, बचा-कुचा खाना खा कर  देर रात को,  भाई-भाभी के सेक्सी शरारतभरे खेल याद करते-करते गहरी नींद में चले जाने की  नाकाम कोशिश वह  करता रहता और अगर फिर भी नींद न आयें तो...तो...तो...?

 
किसी बैल की भाँति मज़दूरी करने के बदले में, शेठ की गंदी गालियाँ मिलने के कारण त्रस्त हो कर, उसने एक दिन, शेठ के गाली देते ही, उसके हाथ में जो औज़ार था, वह शेठ के सिर पर दे मारा और पिछे मुड़ कर देखे बिना, किसी को कुछ बताये बिना ही, कारखाने से भाग निकला और इस गाँव में आकर छुप गया..!! 

 
इस बात को आज पूरे सात साल बीत चुके हैं । उसने अपने पुराने शेठ का ना कभी संपर्क किया,ना अपने भाई-भाभी का..!!

 
इस गाँव ने इन सात सालों में उसे नौकरी और सुंदर पत्नी दोनों दिए हैं..!! आज वह बिलकुल दुःखी नहीं है..!! उसने अपने मन को सहलाया, छोड़  ना  या..र, ये सारी पुरानी बातें..!!   

 
मानो, पुरानी यादों को, वह सचमुच मन के भीतर से बाहर उखाड़ फेंकना चाहता हो, फिर एक बार, दोगुना ज़ोर आज़मा कर,वह  रास्ते पर थूका..हा..क्..थू..उ..उ..!!

 
शाम के साढे सात बजे होंगे और अचानक गाँव की निर्जन गली में, जल्दी घर पहुँच ने की हड़बड़ी में, करीब-करीब भागते कदम भरती हुई, १४-१५ साल की एक लड़की पर, उसकी गरमा गरम नज़र पड़ी ।

 
इस कन्या को अकेली पाकर,उसके भीतर का शैतान शिकारी, बिना कुछ सोचे-समझे, तुरंत जाग उठा । अतिशय उत्तेजना से उसका शरीर कांप ने लगा..!!  उसने भी दौड़ते हुए कदमों से, उस लड़की के करीब जा कर उसे दबोच लिया और  वह लड़की कुछ समझती-चिल्लाती, उसने लड़की का मुँह दबा कर, उसे पास के खंडहर जैसे एक निर्जन मकान में खींच लिया ।

 
सवेरे-सवेरे किसी ग्रामजन ने, गाँव की युवा महिला सरपंच सावित्रीदेवी को ख़बर पहुँचाई और देखते-ही देखते उस सुनसान टूटे फूटे मकान के पास कई सारे लोग इकट्ठा हो गए ..!!

 
महिला सरपंच ने तुरंत पुलिस बुलाई । गाँव के मंदिर के पुजारी की इकलौती लड़की मंदिरा की लाज लूट कर, किसी शैतान शिकारी ने बड़ी ही बेरहमी से, उसे क्षतविक्षत कर दिया था ।

 
हालाँकि, मंदिरा अभी तक जीवित थी,पर बेसुध अवस्था में अब तक भयंकर दर्द  से कराह रही थीं । आनन फानन में, पुलिस ने मंदिरा को गाँव के पास, ज़िला की बड़ी सरकारी अस्पताल में भर्ती करवा दिया । डॉक्टर ने मंदिरा का परीक्षण करने के बाद बताया कि, उसके साथ बलात्कार हुआ था और इस बर्बर घटना के असह्य आघात के कारण, मंदिरा अवाक-गुंगी हो गई थीं । मंदिरा की बूरी हालत देख कर, ज़िला पुलिस अधिकारी ने अस्पताल अधिकारियों को उसकी अच्छी तरह देखभाल करने की ताक़ीद कि । 

 
यहाँ, गाँव में, गाँव वालों का गुस्सा सीमा पार कर रहा था ।

 
थोड़े ही दिन पहले, गाँव में भीख माँगकर अपना गुजारा कर रही एक पागल औरत पर बलात्कार हुआ था और उसका बलात्कारी पकड़ा जाए,उसके पहले ही यह फूल जैसी कोमल  नाबालिक  लड़की मंदिरा पर बलात्कार का गंभीर मामला?

 
प्यारे दोस्तों, ये रहस्य कथा अभी बाक़ी है । पर  यहाँ  एक अहम सवाल ये  भी उठ रहा है  कि..!!

 
कोई भी इन्सान बलात्कारी क्यों बनता होगा?

 
आज भी देश में, १२`x१५` फुट के असुविधाजनक छोटे से कमरे में, कितने परिवार गुज़र-बशर कर रहे होंगे?

 
क्या वे सारे दंपति, अपने नासमझ बच्चों के सो ने का इंतज़ार किए बगैर ही, अपने जातीय उत्तेजना की संतुष्टि करते होंगे?

 
क्या  अनेक कारणों में बलात्कार की घटनाएँ बढ़ने का यह भी एक कारण हो सकता है? 

 
आपके पास इसका है कोई जवाब?अगर नहीं है तो..!!

 
दोस्तों, इस रहस्य कथा में आगे क्या हुआ?

 
क्या शैतान बलात्कारी पकड़ा गया? कौन था वह दरिंदा?
 
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आपने यहाँ तक पढ़ा था? अब आगे, बाकी कहानी भी पढ़िये और कृपया अपनी अमूल्य राय भी दीजिए ।
 
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सिर्फ दस दिनों में, इसी गाँव में, बलात्कार का ये दूसरी भयंकर घटना घटी थी, इसलिए सभी को लगा रहा था कि, अब गाँव में किसी की भी, माँ-बहन-बहु-बेटी की  इज़्ज़त-आबरू सलामत नहीं है?

 
गाँव की पंचायत और ज़िला पंचायत के चुनाव नज़दीक थे,अगर जल्द ही ये नराधम बलात्कारी पकड़ा न गया तो, 
सत्ताधारी पक्ष को चुनाव में भारी नुकसान होने वाला था..!! ऐसे में गाँव की महिला सरपंच सावित्रि देवी और खास कर के उनके पति देव सत्यवानजी द्वारा आक्रोशित प्रति भाव और ज़िला पुलिस अधिकारी समक्ष, बड़े ही सख़्त शब्दों में, पेश किए गए आवेदन-पत्र  के कारण, इस छोटे से गाँव में, राज्य के गृह मंत्री, गृह सचिव और उपरी रेंक के ज़िला पुलिस अधिकारी को, गाँव वालों के साथ, आज  बैठक करनी पड़ी ।

 
गाँव लोगों की उपस्थिति में आयोजित की गई बैठक में माहौल बहुत तंग था और फिर जब  महिला सर पंच के पति श्री सत्यवानजी ने, गाँव वालों के आक्रोश और व्यथा का बयान करते हुए, ज़िला पुलिस अधिकारियों को, ये तक कह डाला कि," आप हमें झूठा भरोसा देने के बजाय, उस शैतान बलात्कारी को फौरन पकड़ ने इंतज़ाम कीजिए, व्यर्थ भरोसे की बातें करना तो सभी को आता है..!! इतनी बेरहमी से अगर आप की खुद की बहन-बेटी के साथ बलात्कार हुआ होता तब, आपको हमारा दर्द महसूस होता..!!"

 
हालाँकि, श्री सत्यवानजी के इतने कठोर वचन सुनते ही, ज़िला पुलिस अधिकारी गुस्से से भड़क उठे और बैठक से उठ कर जाने लगे । मामला तंग होता देख कर गृह मंत्री जी ने जैसे तैसे, बीच-बचाव करके, मामले को ठंडा किया और बलात्कारी को पकड़ने के लिए, पुलिस को केवल पंद्रह दिन की  मोहलत दी ।

 
करीब चार रोज़ बाद ही, मंदिरा को अस्पताल से छुट्टी मिल गई, पर उसकी वाचा  छिन गई, इस बात का उसे बहुत दुःख हो रहा था । घर आ कर मंदिरा ने, पुजारी पिताजी की राय मान कर, पिता के साथ मंदिर में ईश्वर की आराधना में अपना दिल लगाया ।

 
राज्य के गृह मंत्री, गृह सचिव और उपरी रेंक के ज़िला पुलिस अधिकारियों के साथ आयोजित कि गई बैठक को एक माह बीतने को आया था, पर पुलिस अभी तक हवा में हाथ-पैर उछाल रही थीं..!! पुलिस ने गाँव के कुछ छटे हुए नशैड़ी बदमाशों को हिरासत में ले लिया था और उनकी पूछताछ चल रही थी, पर परिणाम शून्य था ।

 
पुलिस की मान्यता अनुसार, बलात्कारी-शिकारी ने, पुलिस की सतर्कता के कारण,  या तो गाँव छोड़ दिया होगा या फिर वह इतना शातिर अपराधी है कि, उसने अपने आप को, कुछ दिनों के लिए संयमित कर लिया है..!!

 
ऐसे में आखिर पुलिस यह मान कर गाँव में गश्त लगा रही थीं कि,उस शातिर शिकारी बलात्कारी के मन में बसा वासना का कीड़ा, ज्यादा दिन तक उसे संयमित न रहने देगा, बहुत जल्दी उसे और एक अपराध करने के लिए, उकसा कर बाहर खींच ही लाएगा?

 
और सचमुच हुआ भी ऐसा..!! बलात्कार की  घटना को घटे, एक मास ही बीता था कि, एक दिन भरी दोपहर के समय, गाँव के बाहर, बग़ीचे में, मंदिर में भगवान की पूजा के लिए, फूल चुनने के लिए बग़ीचे में आई हुई, गुंगी मंदिरा को सरल शिकार समझ कर, फिर से एक बार उसी शिकारी ने, मंदिरा को अपने विक़ारी आगोश में, मजबूती से जकड़ लिया..!!

 
पर, शायद आज ईश्वर मंदिरा की सहायता के लिए हाजरा-हजूर था..!!

 
शिकारी की बदनियत को पहचान कर, भारी आघात और भय के कारण, अत्यंत ड़री हुई मंदिरा के कंठ से, चारों दिशा में गूंजती हुई, एक ऐसी भयानक मरणासन्न चीख निकल पड़ी कि, आसपास खेतों में काम कर रहे कई ग्रामीण एक साथ, मंदिरा की सहायता के लिए, दौड़ पड़े..!!

 
मंदिरा की भयंकर चीख सुन कर गांव के इतने सारे लोगों को एक साथ उसकी मदद के लिए  दौड़ते आते देख कर,  गभराये हुए शिकारी ने, बग़ीचे की नुकीले तार की आड़ के उपर से, उँची छलांग लगाई और फिर वह गाँव की ओर बेतहाशा भागा..!!

 
हालाँकि,इतनी देर में वहाँ पर गश्त लगा रही पुलिस की जीप भी आ पहुँची और शिकारी को सब ने मिल कर पकड़ लिया । पुलिस ने जब उसके मुँह पर बंधा रूमाल हटाया तो, उस दरिंदे को पहचान कर, उपस्थित सभी लोग आश्चर्यचकित रह गये..!!

 
जी हाँ, वह नराधम बलात्कारी शिकारी और कोई नहीं, पर महिला सर पंच सावित्रि देवी का पति सत्यवान ही था..!!

 
पुलिस थाने में, सत्यवान ने बयान दिया कि,"सर पंच की थका देने वाली जिम्मेदारी और कार्यभार से लदी हुई, उसकी पत्नी सावित्रि देवी कई महीनों से,  उससे सभी मायने में विमुख हो गई थी ।  जिसके चलते, बचपन से पाल पोष कर द्रढ हुए, बड़े भाई-भाभी  के सेक्स के शरारती खेल वाले वासनाई कीड़े ने, सात साल बाद अपना कवच तोड़ कर, फिर एक बार, सत्यवान के मन के संतुलन को काटना शुरू कर दिया था..!!"

 
हालाँकि, सत्यवान अपने आपको थोड़ा संभाल पाता, इस वासनाई कीड़े ने सत्यवान के मन में थोडे ही दिनों में,  इतना घना जाल फैला दिया कि, वह `अच्छा-बुरा` सोचने की सुध खो बैठा और अपनी हवस मटाने के लिए, दस दिन के अंतराल पर, भयंकर   बलात्कार जैसा निंदनीय कार्य कर बैठा?

 
मानसिक चिकित्सकों के मतानुसार, सत्यवान का केस, सायकिक केस था ।

 
जघन्य बलात्कार के अपराध में, सत्यवान के पकड़े जाने के दूसरे ही दिन, महिला सर पंच सावित्रि देवी ने,अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी निभाते हुए, समाज में अधिक मान भंग होने के डर से अपने पद से त्यागपत्र दे दिया और अपने तीन साल के बेटे को साथ ले कर, अपने पति सत्यवान के ऐसे निंदनीय और पूरे गाँव में भारी फ़ज़ीहत कराने वाले निंदनीय कार्य के कारण मारे शर्म के, हमेशा के लिए गाँव छोड़ कर, सावित्रि देवी ने, रोते-बिलखते हुए, अपने मायके की राह पकड़ ली ।

 
आजकल बलात्कारी शिकारी सत्यवान पर कोर्ट की कार्यवाही चल रही है । सत्यवान के मन में पले बड़े हुए वासनाई कीड़े को, अधिक लाड़  प्यार लड़ाने की भारी ग़लती के कारण, वह भिखारन पागल औरत, नाबालिक कन्या मंदिरा और पत्नी सावित्रि देवी के साथ-साथ उनके तीन साल के बेटे को,अंधकारमय भविष्य के पतन की खाई में  सत्यवान ने धकेल दिया..!!

 
पौराणिक सत्य काल में, एक सती सावित्रि देवी ने अपने सतीत्व के तपोबल पर, यमराज के मृत्युपाश से, अपने पति सत्यवान को छुड़ाया था  और आज कलयुग में एक सत्यवान ने अपनी आचारभ्रष्ट हरकतों से, बेकसूर पत्नी सावित्रि देवी-बेटे को,समाज में मान भंग कराके, उसके पीहर, वन वास भेज कर, जीते जी मृत्युपाश में  धकेल दिया था?

 
क्या आपको लगता है, सत्यवान के नैतिक पतन में, उसके बड़े भाई-भाभी की असंयमित सेक्सी शरारतों का हाथ है?

 
छोटे-छोटे कमरों में रहने वाले परिवार हो या फिर आलिशान महलनुमा बंगले में रहने वाले परिवार, अगर नासमझ बच्चों की उपस्थिति में, कोई दंपति निजी सेक्सी हरकतों में संयम बरतता नहीं है तब ऐसे में उनके संतान, वयस्क हो कर, भविष्य में  ऐसे ही सायकिक केस बन जाते हैं..!!

 
शायद,बच्चों के मन पर, टीवी शॉ के सेक्सी खुलेपन से भी ज्यादा बूरी असर, परिवार के सदस्यों के,सीधे, आँखो देखे, नंगेपन से होती होगी?

 
Dr. Phil Rich, Ed.D., LICSW के मतानुसार,
 
" In an age when childhood sexual abuse and victimization is increasingly on our minds, it is important for parents (and other caretakers) to understand what is "normal" sexual development and behavior in children and teenagers, and which behaviors might signal that a child is a victim of sexual abuse, or acting in a sexually aggressive manner towards others."

 
( Dr. Phil Rich is the Clinical Director of the Stetson School-Barre, Massachusetts-United States-Established-1899, a long-term residential treatment program for sexually reactive children and juvenile sexual offenders)

 
समाज में बलात्कार की बढ़ती निंदनीय घटनाओं के पिछे आपको,इसके अलावा और कौन-कौन  से कारण नज़र आते हैं?

 
दोस्तों, बताइएगा ज़रूर, क्योंकि ये समस्या, हम सभी की माँ-बहन-बहु-बेटी की सलामती के साथ जुड़ी हुई है..!!

 
मार्कण्ड दवे ।  दिनांकः २४-०६-२०११.

Friday, June 24, 2011

रहस्य कथा-शिकारी ।


रहस्य कथा-शिकारी ।
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सौजन्य-गूगल


दोस्तों,एक छोटा सा  पक्षी, विशालकाय विमान को आसमान से धरती पर गिरा सकता है..!! एक छोटी सी चींटीं विशालकाय हाथी को पागल बना सकती है..!! और मन के भीतर, पैदा हुआ वासना का एक छोटा सा कीड़ा,किसी भी महा चरित्र्यवान मानव को पतन की खाई में धकेल देता है..!!


पिछले कई दिनों से, शिकारी को इसका नया शिकार हाथ न आया था । कई दिनों से वासना और विक़ार के नशे की अपूर्तता के कारण इस शिकारी को, एक नशाख़ोर व्यसनी की छटपटाहट से  भी अधिक बैचेनी आज हो रही थी । वासना के कारण गरम हो कर दौड़ रहे खून में अब भयंकर उछाल आने की तैयारी थी । 


हा..क्..थू..उ..उ..!! शिकारी ने अश्लीलता पूर्वक, रास्ते पर थूक दिया । शिकारी का मन बचपन की यादों से, खट्टा होने लगा..!! 


बचपन से ही, १२` x १५` फुट के सिर्फ एक कमरे के कायमी निवास में, पूरा खान दान रहता था, ऐसे में कभी-कभी तो उसके सो जाने का  भी इंतज़ार किए बिना ही, उसका बड़ा भाई और भाभी रात को शारीरिक छेड़छाड़ के साथ  सेक्स  की मस्ती का जो खेल शुरु कर देते थे, उसे वह पहले-पहल तो अचरज वश हो कर और बाद में, कमरे में फैले धुँधले प्रकाश में, अध-खुली  आँख से उन दोनों की सेक्सी शरारतों की चरम सीमा को देख कर, वह वयस्क  होता रहा । 


हद तो तब होने लगी, जब  उसने बड़े भाई-भाभी की सेक्सी शरारतों की आज़माइश विद्यालय के पायखाने मे, अपने विद्यालय के सहपाठीओं के साथ करनी शुरू कर दी..!! ज़ाहिर है कि, इस गंदी हरकतों की शिकायत  प्रधानाचार्य, उसके भाई से बार बार करने लगे..!!  


नतीजन एक दिन आखिर थक-हार कर, बड़े भाई ने उसे विद्यालय से एकाएक नाम कटवा कर, पढ़ाई छुड़वा  दी और नज़दीक के शहर में, एक कारखाने में, उसे मज़दूरी पर भेज दिया ।


कारखाने के मालिक को तो मानो चौबीसों घंटे का नौकर मिल गया, उसे रहने के लिए कम्पाउन्ड में हू, मालिक के बंगले के पिछे, एक छोटा सा कमरा शेठ ने दे दिया । पूरा दिन  कारखाने और बंगले का इतना सारा काम करने के बाद  बदन असह्य  दर्द करने लगे तब, शेठानी का दिया हुआ, बचा-कुचा खाना खा कर  देर रात को,  भाई-भाभी के सेक्सी शरारतभरे खेल याद करते-करते गहरी नींद में चले जाने की  नाकाम कोशिश वह  करता रहता और अगर फिर भी नींद न आयें तो...तो...तो...?


किसी बैल की भाँति मज़दूरी करने के बदले में, शेठ की गंदी गालियाँ मिलने के कारण त्रस्त हो कर, उसने एक दिन, शेठ के गाली देते ही, उसके हाथ में जो औज़ार था, वह शेठ के सिर पर दे मारा और पिछे मुड़ कर देखे बिना, किसी को कुछ बताये बिना ही, कारखाने से भाग निकला और इस गाँव में आकर छुप गया..!!  


इस बात को आज पूरे सात साल बीत चुके हैं । उसने अपने पुराने शेठ का ना कभी संपर्क किया,ना अपने भाई-भाभी का..!! 


इस गाँव ने इन सात सालों में उसे नौकरी और सुंदर पत्नी दोनों दिए हैं..!! आज वह बिलकुल दुःखी नहीं है..!! उसने अपने मन को सहलाया, छोड़  ना  या..र, ये सारी पुरानी बातें..!!    


मानो, पुरानी यादों को, वह सचमुच मन के भीतर से बाहर उखाड़ फेंकना चाहता हो, फिर एक बार, दोगुना ज़ोर आज़मा कर,वह  रास्ते पर थूका..हा..क्..थू..उ..उ..!!


शाम के साढे सात बजे होंगे और अचानक गाँव की निर्जन गली में, जल्दी घर पहुँच ने की हड़बड़ी में, करीब-करीब भागते कदम भरती हुए, एक १४-१५ साल की लड़की पर, उसकी गरमा गरम नज़र पड़ी ।


इस कन्या को अकेली पाकर,उसके भीतर का शैतान शिकारी, बिना कुछ सोचे-समझे, तुरंत जाग उठा । अतिशय उत्तेजना से उसका शरीर कांप ने लगा..!!  उसने भी दौड़ते हुए कदमों से, उस लड़की के करीब जा कर उसे दबोच लिया और  वह लड़की कुछ समझती-चिल्लाती, उसने लड़की का मुँह दबा कर, उसे पास के खंडहर जैसे एक निर्जन मकान में खींच लिया ।


सवेरे-सवेरे किसी ग्रामजन ने, गाँव की युवा महिला सरपंच सावित्रीदेवी को ख़बर कि और देखते-ही देखते उस सुनसान टूटे फूटे मकान के पास कई सारे लोग इकट्ठा हो गए ..!!


महिला सरपंच ने तुरंत पुलिस को बुलाई । गाँव के मंदिर के पुजारी की इकलौती लड़की मंदिरा की लाज लूट कर, किसी शैतान शिकारी ने बड़ी ही बेरहमी से, उसे क्षतविक्षत कर दिया था । 


हालाँकि, मंदिरा अभी तक जीवित थी,पर अभान अवस्था में अब तक भयंकर दर्द  से कराह रही थीं । आनन फानन में, पुलिस ने मंदिरा को गाँव के पास, ज़िला की बड़ी सरकारी अस्पताल में भर्ती करवा दिया । डॉक्टर ने मंदिरा का परीक्षण करने के बाद बताया कि, उसके साथ बलात्कार हुआ था और इस बर्बर घटना के असह्य आघात के कारण, मंदिरा अवाक-गुंगी हो गई थीं । मंदिरा की बूरी हालत देख कर, ज़िला पुलिस अधिकारी ने अस्पताल अधिकारियों को उसकी अच्छी तरह देखभाल करने की ताक़ीद कि ।  


यहाँ, गाँव में, गाँव वालों का गुस्सा सीमा पार कर रहा था । 


थोड़े ही दिन पहले, गाँव में भीख माँगकर अपना गुजारा कर रही एक पागल औरत पर बलात्कार हुआ था और उसका बलात्कारी पकड़ा जाए,उसके पहले ही यह फूल जैसी कोमल  नाबालिक  लड़की मंदिरा पर बलात्कार का गंभीर मामला?

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प्यारे दोस्तों, ये रहस्य कथा अभी बाक़ी है । पर  यहाँ  एक अहम सवाल ये  भी उठ रहा है  कि..!! 

कोई भी इन्सान बलात्कारी क्यों बनता होगा? 

आज भी देश में, १२`x१५` फुट के असुविधाजनक छोटे से कमरे में, कितने परिवार गुज़र-बशर कर रहे होंगे? 

क्या वे सारे दंपति, अपने नासमझ बच्चों के सो ने का इंतज़ार किए बगैर ही, अपने जातीय उत्तेजना की संतुष्टि करते होंगे? 

क्या  अनेक कारणों में बलात्कार की घटनाएँ बढ़ने का यह भी एक कारण हो सकता है?  

आपके पास इसका है कोई जवाब?अगर नहीं है तो..!! 

दोस्तों, इस रहस्य कथा में आगे क्या हुआ?

क्या शैतान बलात्कारी पकड़ा गया? कौन था वह दरिंदा?


मार्कण्ड दवे ।  दिनांकः २४-०६-२०११.

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