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Tuesday, August 9, 2016

इलाज ।

मिटेगी  नहीं  ईज़ा  कभी, आँख  यूँ  बंद कर लेने से,
ढूंढ़ना   पड़ता  है   इलाज  उसका,  बड़ी  बेरहमी से..!


ईज़ा = तक़लीफ़,परेशानी;       
इलाज = उपचार;      
बेरहमी = निर्दयता;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः २७ जुलाई २०१६.


Monday, August 8, 2016

बलात्कार ।


पहले  ही  दिन, स्कूल जाती  नन्ही बेटी को, माँ ने  दस बार  रटाया,
"बोल बेटा, दुनिया का सब से ख़तरनाक जानवर, इन्सान होता है..!"


रटाना = मुँहज़बानी (याद);

मार्कण्ड दवे । दिनांकः ०६ अगस्त २०१६.


Sunday, August 7, 2016

बचपना ।

बचपना  छोड़ कर अब, सयाने  हो जाओ  ए  जानम,
ऐसी दिल्लगी तो कभी,रब ने भी  न  कि हमारे साथ..!


सयाना = वयस्क;                   
दिल्लगी = मज़ाक;                   
रब = ख़ुदा;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः १५ जुलाई २०१६.


Saturday, August 6, 2016

बोझ ।


इन्तक़ाम की स्याही से, इक ख़त लिखा,उनको जब से,
बोझ  कायम बस गया, दिल के  मकाँ में, आ कर तब से..!


बोझ = जवाबदेही; 
मकाँ  = मकान;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः ०६ अगस्त २०१६.


Friday, August 5, 2016

हताहत ।


बेशुमार लोग, हताहत होने की ख़बर आई है..!
क्या, प्रेमरोग का  कहर बरपा है, तेरे शहर में ?


बेशुमार = बहुत ज्यादा;   
हताहत = अधमरे,घायल;  
कहर = संकट;    
बरपना = फैलना;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः १२ जुलाई २०१६.


Thursday, August 4, 2016

इन्तज़ार ।


इन्तज़ार का लुत्फ़, चाह कर,उठा न सका मैं कभी,
दिल से गए  न  तुम कभी, जाने दिया न  मैंने कभी...!


लुत्फ़ = आनंद;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः २२ जुलाई २०१६.


Wednesday, August 3, 2016

हरा ज़ख़्म ।


दिल का ज़ख़्म  हरा  ऊपर से, नीम-तानों का  तड़का..!
अरमानों को  आग लगा के, पूछते  हो, `कैसे  हो  भला ?`


हरा ज़ख़्म = ताज़ा घाव;    
नीम-ताना = कड़वा  कटाक्ष;    
तड़का = बघार;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः २९ जुलाई २०१६.


Tuesday, August 2, 2016

वक़्त से पहले ।


जहन्नुम से, दफ़ा  किया  उनको, वक़्त से  पहले ही,
उकसा रहे थे  रूहों को, ले कर  धरम-जात, वहाँ भी..!


जहन्नुम =  नर्क,पापलोक;      
दफ़ा करना = निकाल देना (To get out); 
 उकसाना = भड़काना;              
रूह = मृतात्मा;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः ०१ अगस्त २०१६.


Monday, August 1, 2016

पलक ।


रब ने पूछा  मुझ से,`बता, ज़िंदगी की  तफ़सीर  क्या है ?`
मैंने   कहा,` दो  मौत के  बीच,  कुछ  पलकें  झपकाना..!`


तफ़सीर = व्याख्या,परिभाषा;        
 पलक झपकाना = आँखे झपकना;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः ३१ जुलाई २०१६.


Sunday, July 31, 2016

मेहरबानी ।

ऊँचे  पहाड़  सी  हो  चुकी  है, मेहरबानीयाँ  तेरी, 
चढ़ ना  पाएगी  कभी, अपाहज  खुद्दारी  ये  मेरी..!


अपाहज = अपंग;     
खुद्दारी = स्वाभिमान;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः २० जून २०१६.


Saturday, July 30, 2016

बेटी ।


जानती थी जिन्हें, सारे के सारे, अजनबी-अनजान लगे,
बिदा  हुई   मैं   घर से   ऐसे,  जैसे   कोई   मेहमान चले..!


मार्कण्ड दवे । दिनांकः २९ जुलाई २०१६.


Friday, July 29, 2016

दर्द ।


कई लोग, अक्सर  टूट जाते  हैं, दर्द  को  झेलने  में,
शाकिर हूँ  तेरा, माहिर  हुआ  मैं, दर्द  से  खेलने  में..!


अक्सर = आमतौर पर;          
शाकिर = आभारी;         
माहिर =  निपुण;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः ०८ जुलाई २०१६.


Thursday, July 28, 2016

आती-जाती सांस ।


आती-जाती  सांसों ने  आज, फिर  ललकारा  आपस में,
छोड़ न दे कहीं, काम वो अपना, इतनी गहरी रंजिश में..!


ललकारना = झगड़ने के लिए भड़काना;         

रंजिश = दुश्मनी;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः २६ जुलाई २०१६.


Wednesday, July 27, 2016

दुश्मनी ।


जम कर निभाते हैं दुश्मनी, पीने वाले  ख़ुद-ज़िंदगी से,
तभी  तो, मिसाले  यार  होता  है  साक़ी, शराबख़ाने में..!


जम कर = दृढ़तापूर्वक;  
मिसाले यार = सब से श्रेष्ठ दोस्त;  
साक़ी  = शराब पीलाने वाला;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः २६ जुलाई २०१६.


Tuesday, July 26, 2016

आरामगाह ।



आरामगाह में, किसी ओर का तसव्वर, हराम बात है,
बर्बाद  हो  सकती  है, रातों की नींद, ऐसी बद वफ़ा से..!


आरामगाह = शयनकक्ष (Bedroom); 
तसव्वर = कल्पना; 
हराम = ख़राब;
बद = वाहियात;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः २१ जुलाई २०१६.


Monday, July 25, 2016

कारनामा ।


रोज़ाना, डूबते सूरज का राज़, खुल गया है आख़िर,
ऊब जाता है वो  दिन भर, हमारे कारनामे  देख कर..!


रोज़ाना = हर रोज़;  
राज़ = भेद;   
कारनामा = उलटा-सीधा धंधा; 
ऊबना = अरुचि होना;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः १८ जुलाई २०१६.


Sunday, July 24, 2016

शिकायत ।


मुद्दत  हुई,  मेरे  अपनों  को, शिकायत  नहीं  कोई  मेरी..!
सुधर गए  क्या  निंदक सारे ? या मुझ में आई  ऐब नयी..!


मुद्दत = बहुत अधिक समय;
      
निंदक = निन्दा करने वाले;
  
ऐब  = दुर्गुण;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः २३ जुलाई २०१६.


Saturday, July 23, 2016

हुकुम ।

सरे  आम, सर  पटक  कर  मरने  में, ग़ैरत कहाँ ?
मगर, जैसा भी हो, उनका हुकुम, सर-आँखो पर..!


सरे आम = खुलेआम; 
ग़ैरत = स्वाभिमान;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः २२ जून २०१६.


Friday, July 22, 2016

दिल से ।


दिमाग़  के सहारे, अपने दर्द को  जब, उसे  बेचना चाहा,
उसने  कहा, दिल  से  बेचते  तो, मुँह  मांगा  दाम  देती  मैं..!


मार्कण्ड दवे । दिनांकः २० जुलाई २०१६.


Thursday, July 21, 2016

चुनाव ।

मंदिर-मस्जिद, मुल्ला-योगी, दलित- पीड़ित, छा गए  मीडिया में,
अरे   या...र,  ये  चुनाव भी  ना ? बड़े  बेशरम  है, फिर  से  आ  गए..!


मार्कण्ड दवे । दिनांकः १८ जुलाई २०१६.


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