Friday, September 9, 2016

शोख़ियाँ ।

शोख़ियाँ कभी, जान लेवा भी हो सकती  है,
चाहत   जब,  औरों  के  आग़ोश  में  होती  है...!

शोख़ियाँ =  नख़रेबाज़ी,नाज़नखरा;     
आग़ोश = आलिंगन;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः ११ जून २०१६.

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