Sunday, September 11, 2016

आजकल ।

फ़ाक़ामस्ती के  दिन  आ गए, आजकल  इश्क में,
छोड़ दिया, दिल को बहलाना, आजकल  इश्क में...!

फ़ाक़ामस्ती =  बेफ़िक्री;    
बहलाना = दिलासा देना;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः ११ जून २०१६.

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