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Wednesday, June 8, 2011

फिल्म - नौनिहाल । " तुम्हारी ज़ुल्फ के साये में "

फिल्मी गज़ल रसास्वाद लेखमाला । श्रेणी-२.
फिल्म - नौनिहाल । " तुम्हारी ज़ुल्फ के साये में "

सौजन्य-गूगल
प्यारे दोस्तों,
 
पुराने ज़माने की यादगार पलों को ज़िंदा करनेवाली,किसी कला कृति के समान हिन्दी फिल्में, आजकल के वर्षो में, सिर्फ गिनी चुनी संख्या में ही फिल्में निर्माण होती है । ऐसे में उसके अल्पकालीन गीत-संगीत के बारे में तो क्या कहें?

फिल्मी-गीत-संगीत की पायरसी जैसी कई समस्याओं से निज़ात पाने के लिए संघर्ष कर रहे, फिल्म निर्माण के साथ जुड़े हुए सारे लोगों को ढेर सारी मजबूरीओं  के कारण, `आज फिल्म बनायी-आज ही कर ली कमाई` जैसी वायु की गति से  फिल्म निर्माण करने की जब नौबत आ गई हो तब, पैसों के पिछे पागल हुए इन सारे कलाकारों के पास, सर्वोत्तम फिल्मों की आशा रखना, ये बात सेहरा में, दो बूँद पानी ढूंढने जैसी मुश्किल सी  लगती है ।
 

हालाँकि, इन सारे लोगों के साथ न्याय करते हुए, हमें इतना ज़रूर कहना चाहिए कि, पुरानी क्लासिक फिल्मों की याद दिलाने वाली,  बेनिमून नयी क्लासिक फिल्मों का निर्माण कभी-कभार होता तो है, पर ऐसी नयी  फिल्मों का बॉक्स ऑफ़िस पर कैसा बुरा हाल होता है, ये बात सभी को अच्छी तरह ज्ञात है..!!

पहले फिल्मों में प्रेमालाप के दृश्य ऐसे कलात्मक और वास्तविक तरीके से फ़िल्माये जाते थे कि, पुराने समय के सारे प्रेमी-प्रेमिकाएं, उन नायक-नायिका  की नकल करते हुए, अपनी प्रेम भावना का इज़हार करने के लिए, एक दूजे के प्रेम पत्र में  उन फिल्मों के गीत के बोल का उपयोग किया करते थे । इतना ही नहीं, उस समय फिल्म को कला और पूजा का माध्यम समझ कर, धैर्य और पूर्ण समर्पण भाव से, साधना की भाँति फिल्में निर्माण की जाती थी । (आजकल फिल्में हड़बड़ी में सिर्फ बनायी जाती हैं?)

मुझे याद है, वास्तविक जीवन में, पहले कई नाकाम प्रेमी-प्रेमिका, मध्य वयस्क होने तक, केवल क्षण भर के नयन के मिलन मात्र से, संतोष पाकर, सारा जीवन, प्रेम की यादों के सहारे बिता देते थे..!! इसीलिए शायद किसी कवि ने ठीक ही कहा है, "प्रेम भूख से नहीं, कब्ज से मरता है ।"

पर, आजकल के नायक-नायिका की नकल करने वाले प्रेमीओं को, ये सनातन सत्य जान लेना अत्यंत आवश्यक है कि,"अति सर्वत्र वर्जयेत ।"

आइए, आज इस कथन के समर्थन में, एक ऐसी फिल्मी गज़ल का रसास्वाद करें, जिस के बोल, आज भी सभी संगीत प्रेमी के दिल के बहुत करीब है..!!

फिल्म का नाम है - नौनिहाल ।

गीत कार - कैफ़ी आज़मी साहब ।

संगीतकार- मदनमोहन जी ।

गायक - मोहम्मद रफीसाहब ।

गज़ल के बोल है -"तुम्हारी ज़ुल्फ के साये में शाम कर लूँगा...,"

गज़ल की जाति- संपूर्ण । (सा,रे गा,मा,पा,धा शुद्ध है जब की निषाद शुद्ध और कोमल दोनों का प्रयोग किया गया है ।

ताल- दादरा ।

दोस्तों, इस गज़ल में संगीत के चाहकों का, एक सरल मगर मन मोहक बोल की ओर ध्यान आकर्षित करने का मन करता है ।

संगीत के मर्मज्ञ जानते हैं कि,गीत-गज़ल के आखिरी स्वर को,"LANDING NOTE" कहते हैं, इस गज़ल में हर एक अंतरा के अंत में, श्रीरफीसाहब ने,"LANDING NOTE-लूँगा" शब्द पर गायकी की अलग-अलग अदा (भाव गायकी) दर्शायी है, जिसे वर्णन करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है, वैसे भी इसे  सिर्फ गज़ल सुनते समय ही महसूस किया जाता है । कृपया आप भी "लूँगा" शब्द पर ध्यान दें, आप को भी गज़ल की हर एक लाइन में अलग-अलग प्रकार से  की  गई, भाव गायकी का प्रमाण मिल जाएगा । 

श्रीमोहम्मद रफीसाहब को शायद इसी लिए आज भी सारे संगीत प्रेमी,  प्रेम और आदर के साथ, सच्चे दिल से याद करते हैं..!!



तुम्हारी ज़ुल्फ के साये में शाम कर लूँगा ।
सफ़र इस उम्र का पल में तमाम कर लूँगा ।


१. नज़र मिलाई तो पूछूँगा इश्क़ का अंजाम  ।
    नज़र झुकाई तो ख़ाली सलाम कर लूँगा ।


२. जहाने दिल पे हुकूमत तुम्हें मुबारक हो ।
    रही शिक़स्त तो वो अपने नाम कर लूँगा ।


शब्दार्थ -
 

१. ज़ुल्फ- बालों की लट ।
२. साया - आश्रय ।
३. तमाम- पूर्ण ।
४. अंजाम- आखिरी फैसला ।
५. जहाने दिल- दिल की सल्तनत ।
६. हुकूमत- मालिकाना हक़ जताना ।
७. शिक़स्त- पराजय ।

तुम्हारी ज़ुल्फ के साये में शाम कर लूँगा ।
सफ़र इस उम्र का पल में तमाम कर लूँगा ।


दोस्तों, जब कोई प्रीतम अपनी प्रिया को उसकी बाहों में लेकर,  प्रिया की ज़ूल्फों  की मंद-मंद सुगंध को, अपने मन के भीतर स्थापित कर लेता है, तब आजीवन इसका नशा कम नहीं होता । 


उस समय प्रीतम ने अपनी बाहों मे, किसी प्रिया को नहीं, परंतु ज़िंदगी की सारी सफर को  अपनी आगोश में समेट ली हो ऐसी अनुभूति प्रीतम को होती है ।

१. नज़र मिलाई तो पूछूँगा इश्क़ का अंजाम ।
    नज़र झुकाई तो ख़ाली सलाम कर लूँगा ।


प्यार का नशा दोनों ओर होता है, इसलिए, सर्वांग समर्पण भाव से, मदहोशी की अवस्था में, प्रीतम और प्रिया की नज़र एक होते ही, उभय के प्रेम के अंजाम के बारे में बिना कुछ कहे-सुने, नज़रों से ही कोई एक दूजे  को सवाल करें तब ऐसे इशारे का मर्म पकड़ कर प्रीतम कहता है,


" तुम जो नज़र झुका कर, अगर तेरी कोई मजबूरी ज़ाहिर करेगी तो मैं कोई कारण जानने की कोशिश किए बिना ही, तुझे अलविदा कह कर, तेरी ज़िंदगी से कहीं दूर चला जाउँगा ।

२.जहाने दिल पे हुकूमत तुम्हें मुबारक हो ।
   रही शिक़स्त तो वो अपने नाम कर लूँगा ।

 

मेरे हृदय की संवेदनाओं के साम्राज्य पर, तेरा मालिकाना हक़ अबाधित और अखंड रखते हुए, हमारे नाकाम प्यार के कारण, दुनिया में कहीं पर भी तेरी बदनामी न हो इसलिए, हमारे प्यार की नाकामी का इल्ज़ाम मैं अपने सर ले लूँगा ।

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प्यारे दोस्तों, वैसे तो प्रेम तत्व क्या है?
 

प्रेम का मतलब, हृदय में प्रकट होती एक ऐसी अनुभूति, जो किसी प्रेमी जन के अंतिम सांस लेते समय भी, ईश्वर के बदले अपने प्रेमी जन की छवि को, उसकी नज़र के सामने जीवंत करें..!!




आपको मेरा यह प्रयास कैसा लगा?आप के विचारों का,सच्चे दिल से स्वागत है ।
 

मार्कण्ड दवे । दिनांक-०८-०६-२०११

Saturday, May 28, 2011

वाह क्या प्रेम है..!! wow..!! what a LOVE?


वाह क्या प्रेम है..!!
wow..!! what a LOVE?

(सौजन्य-गूगल)


प्रिय मित्रों,

उत्तर महाभारत महाग्रंथ में कलयुग के भविष्य के बारे में महर्षि वेदव्यास ने कुछ त्रुटिरहित कथन किए हैं ।

शिक्षा जगत में व्याप्त मलिनता के कारण, ज्ञान और विद्या का नाश होगा । ( सही - ग़लत )

( पढ़ने-पढ़ाने वालों की पढ़ाई के क्षेत्र में उदासीनता और सच्चे ज्ञान का ह्रास ?)

आईए, सुनें, एक आधुनिक कॉलेज कन्या की मोबाईल talk..!!

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" अरे यार..!! माय मम्मा भी देखना? सुबह-सुबह कॉलेज जाते वक़्त ही उसकी खिचपिच शुरु हो गई..!! शैला ये ड्रेस मत पहनना, इसमें तेरा सारा बदन दिखता है । आज जल्दी वापस घर आ जाना । यार हमारी कोई चोईस ही नहीं? शैलाब की भी रिंग आई थी ,"हाय हनी, कॉलेज आ रही है ना? आज कहाँ मिलना है? मैं, शैला उसे पोपट से मिलूँ? MY FOOT!! साला कभी पॉकेट में  तो हाथ डालता नहीं है ? LEAVE IT यार..!!"

इस मंथ के मेरे सारे पॉकेट मनी फिनिश हो गए हैं, बट यु नॉ? मैने क्या किया? इस शैला ने  स्मार्टनेस दिखाते हुए, उस पोंगा पंडित कौशिक को ऐसी मीठी स्माईल देदी कि, उसने ५०० का नोट तुरंत निकाल कर मुझे दे दिया । नहीं यार, फ्री में नहीं..!! उसके बदले, मैंने उसके साथ लोंग ड्राइव पर जानेका प्रोमिस किया है ।

तु भी आएगी क्या? वो रितुडी को हमारे साथ आना था मगर, you know !! वो सिर्फ न्यूज़ पेपर नहीं, पूरा न्यूज़ चैनल है? क्या, ऍक्ज़ाम नज़दीक है? तु कब से ऍक्ज़ाम की फ़िक्र करने लगी? ही..ही..ही..!!

मुझे  कोई चिंता नहीं है? you see, मैंने तो वो हॅन्डसम प्रोफेसर हैं ना? हाँ..हाँ, उसी को पटा लिया है..!! मुझे बहुत हॅल्प कर रहा है । नहीं,नहीं..वो मेरा नहीं, शैलाब का  रिलेटिव है । उसका हैबिट थोड़ा ख़राब है, मेरे साथ शॅक हॅन्ड करने के बाद हाथ जल्दी छोड़ता नहीं है..!!नहीं..नही..यार,उसकी? नो मोर हिंमत, शैला को तो तु जानती है ना? मुझे ऐसों को हैन्डल करना अच्छी तरह आता है..!!

सन्डे को क्या करती? या..र..!! मेरा ये सन्डे बिलकुल बेकार गुज़रा । मेरी मम्मा अभी से, you know,जन्म कुंडली और ऐसा ही कुछ समथिंग-समथिंग ले कर, मेरे रिश्ते के लिए रिश्तेदारों से बात करती रहती है? बट, मैंने तो उसको क्लिन-क्लिन कह दिया है, हालाँकि मैं थर्ड ईयर में स्टडी कर रही हूँ,But, I want to study further? 

मेरे पापा? मेरे पापा तो वॅरी-वॅरी nice guy है..!! पता है, एक दिन क्या हुआ था? उन्होंने मुझे हैं ना, शैलाब के साथ बाईक पर चिपक कर बैठे हुए देख लिया था, फिर भी ही डीडन्ट टेल मी अ सिंगल वर्ड..या..र? 

मेरी मम्मा, मेरी शादी को लेकर, फ़ालतू में Worry हो रही है..!! हाँ..मगर पापाने, मम्मा को  टू मच, worry करते देखकर, उसे साफ-साफ कह दिया, शिला  is mature  enough  to take care of her self..!! 

No..no..यार,  कॉलेज के किसी भी पोपट के साथ,मेरेज तो मैं करनेवाली नहीं..!! 

पापा जहाँ कहेंगे, उसी लड़के के साथ..!! you know our संस्कार culture और ऐसा ही कुछ समथिंग-समथिंग, 

O.K. I am in hurry,we will talk  later,bye."

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जान ले लो  मेरी मगर प्यार से(गीत)
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नोट- पूरे गीत में, प्रितम शैलाब गीत गा कर शिला से प्यार जता रहा है और शैला `I DON`T CARE.` कह कर इन्कार कर रही है ।


जान ले लो  मेरी, मगर प्यार से....!!

I DON`T CARE.

ज़ख्म दे  दो नया, मगर प्यार से...!!

I DON`T CARE.

१.

चल पड़ा हूँ मैं, इश्क़ की राह पर ।

दिल रखा है क़दमों में, हर आह पर ।

दो क़दम साथ चल, मगर प्यार से....!!

I DON`T CARE.

२.

ज़ुल्फ़ में तेरी यूं ही उलझता गया ।

अश्क बहते रहे, मैं पिघलता रहा ।

एक नज़र देख ले,मगर प्यार से....!!

I DON`T CARE.

३.

आग सी लग गई, जिस्म जलता रहा ।

साँस  थम  सी   गई, मैं  तड़पता रहा ।

दिल जलाओ मेरा, मगर प्यार से.....!!

I DON`T CARE.

 ४.

कोई  क्यूँ न मरे, बेरूख़ी देख कर ।

कोई कैसे जीए, यार को छोड़ कर ।

क़त्ल कर दो मेरा,मगर प्यार से....!!

I DON`T CARE.

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बस, हम आगे और क्या कहें, साहब..!! अब, आप ही कुछ फरमाईए?

मार्कण्ड दवे । दिनांकः- २९- ०५-२०११.

Monday, March 7, 2011

तुम से प्यार करने की ऋत छा गई है ।

 प्यार करने की ऋत।
(courtesy-Google images)


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प्रिय दोस्तों,

संसार में, मानव के अलावा सभी प्राणीओ के व्यवहार के बारे में अनुमान लगाया जा सकता है,किंतु जब कोई मानव, प्रेम जैसे नाज़ुक और पवित्र बंधन को निभाने के बजाय, हर अंग को जलाने वाली तेज़ धूप बनकर, अपना भाग्य विधाता खुद बनने की कोशिश करता है, तब ऐसे इन्सान को खुद ईश्वर भी सहायता नहीं कर सकता ।

तत पश्चात, सुलग कर राख के ढेर समान, अवशेष प्रेम को बचाने के लिये, उस मानव  के सारे प्रयत्न ऐसे लगते हैं जैसे कि..!!

 समूलं वृक्षं उत्पाट्य शखां उच्छेत्तुं कुतः श्रमः।

अर्थातः- जड़ के साथ पेड़ को काटने के पश्चात, शाखाएँ काटने की जहेमत क्यों उठाना?

वैसे अगर कोई सच्चा प्रेमी, चाहे तो राख से,  फिर से फीनिक्स पंखी कि भांति प्रेम भी सजीवन हो सकता है, मगर यह शक्ति प्राप्त करने से पहले प्रेम क्या है, यह जानना अति आवश्यक  है।

वास्तव में प्रेम क्या  है?

प्रेम इच्छा है - प्रेम महेच्छा है ।
प्रेम बिंब है - प्रेम प्रतिबिंब है ।

प्रेम पुकार है - प्रेम स्वीकार है ।
प्रेम मदहोश है -प्रेम बेहोश है ।


प्रेम हार है -प्रेम जीत है ।
प्रेम धड़कन है -प्रेम तड़पन है।


प्रेम घटा है -प्रेम बिजली है।
प्रेम सावन है -प्रेम पावन है ।


प्रेम चमन है - प्रेम वसंत है।
प्रेम शर्म है -प्रेम वहम है।


प्रेम शराब है -प्रेम शबाब है।
प्रेम निकट है -प्रेम विकट है ।


प्रेम मिलन है -प्रेम विरह है ।
प्रेम बंदगी है -प्रेम जिंदगी है ।


प्रेम नित है -प्रेम सत्य है ।
प्रेम शिव है प्रेम सुंदर है ।


प्रेम ईश्वर है -प्रेम ही परमेश्वर है ।

जब ईश्वर कि कृपा होती है तब प्रेम का बीज अंकुरित होता है । आशा के पुष्प खिलते हैं और लगता है जैसे पपिहे की हर एक बोली के साथ वसंत पूर्ण रुप में खिल उठी है , किसी को प्यार करने की ऋत छा गई है ।

हे प्रीतम, स्वर्ग से भी सुंदर चमन सजायेंगे ।
देखो देखो हरी-भरी वसंत छा रही है ।
हे प्रीतम, प्रेमांकुर अंकुरित होते ही, आशा का संचार हुआ है ।
क्या कहूं,तुमसे प्यार करने की ऋत छा गई है ।


यह सितारे, ये नक्षत्र स्थानांतरित होंगे फिर से ।
विधाता भी लेख लिखें फिर से ।
विधाता को भी ये ज्ञात हो गया है ।
क्या कहूं, तुमसे प्यार करने की ऋत छा गई है ।


प्रेम की धारा बहेगीं यहाँ फिर से ।
ये पुष्प भ्रमर को मनायेंगे फिर से ।
फूलों को भी ये ज्ञात हो गया है ।
क्या कहूं, तुमसे प्यार करने की ऋत छा गई है ।


ये धरती ये अंबर एक हो जायेंगे फिर से ।
मेरे दिल  में चूपके से कोई आयेगा फिर से ।
हवा गुनगुना रही कानों में धीरे से ।
क्या कहूं, तुमसे प्यार करने की ऋत छा गई है ।


प्यार ही पूजा । प्यार ही परमात्मा । प्यार ही बंदगी । यह तीनों का सुलभ समन्वय, इसी का नाम है जिंदगी ।

प्रिय दोस्तों, आपका अनुभव क्या कहता है ?

इसी प्यार को सुरों की माला में  पिरोकर, पेश है, उस्ताद श्री बड़े ग़ुलाम अली साहब की एक रचना,"भोर भयी ।"

आप इस लिंक पर, इसे डाउनलोड भी कर सकते हैं ।

http://goo.gl/EIEoa


मार्कण्ड दवे. दिनांकः ०७ -मार्च - २०११.

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